बॉलीवुड के गलियारों में सितारों के डेयरिंग कारनामों के कई किस्से मशहूर हैं, लेकिन 70 के दशक का एक ऐसा वाकया आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देता है, जब अमिताभ बच्चन ने अपनी जान की परवाह किए बिना एक असली बाघ के साथ खूंखार फाइट सीक्वेंस शूट किया था। उस दौर में वीएफएक्स या तकनीक का सहारा नहीं लिया जाता था, इसलिए कलाकारों को कई बार अपनी जान जोखिम में डालकर असली जानवरों के सामने खड़ा होना पड़ता था। फिल्म ‘खून पसीना’ के दौरान अमिताभ बच्चन का बाघ के साथ यह खतरनाक मुकाबला हिंदी सिनेमा के सबसे साहसी पलों में गिना जाता है, जिसके पीछे की असली वजह जानकर हर कोई हैरान रह जाता है।
एक्शन मास्टर मोहन ने खोले शूटिंग के हैरान करने वाले राज़
हाल ही में दिग्गज एक्शन मास्टर मोहन ने एक इंटरव्यू में इस थ्रिलिंग किस्से से पर्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि मूल रूप से उस खतरनाक सीन को करने के लिए उन्हें यानी मोहन को ही चुना गया था, क्योंकि वह अमिताभ बच्चन के स्टंटमैन थे। मोहन ने बताया कि शुरुआती शॉट्स के दौरान वह काफी डरे हुए थे, क्योंकि बाघ को पूरी तरह ट्रेंड नहीं किया गया था और उसके हमले से चेहरा हमेशा के लिए बिगड़ सकता था। हालांकि, कुछ दिनों तक लगातार शूटिंग करने के बाद जब मोहन ने उस भयानक माहौल में भी हिम्मत दिखाई, तो उन्हें देखकर सेट पर मौजूद अमिताभ बच्चन का हौसला भी काफी ज्यादा बढ़ गया और उन्होंने खुद उस जानलेवा स्टंट को करने का फैसला किया।
अभिषेक बच्चन के जन्म की खबर ने दी थी सुपरपावर जैसी ताकत
इस पूरे वाकये का सबसे दिलचस्प और भावनात्मक पहलू तब सामने आया जब सेट पर एक बड़ी खुशखबरी पहुंची। एक्शन मास्टर मोहन के मुताबिक, जब कांदिवली में फिल्म की शूटिंग चल रही थी, तभी अमिताभ बच्चन को उनके घर से फोन आया कि उनके घर एक बेटे (अभिषेक बच्चन) का जन्म हुआ है। 5 फरवरी 1976 को पिता बनने की इस खबर ने अमिताभ में एक अलग ही जोश और ऊर्जा भर दी। उन्होंने गर्व से कहा था, “मेरे घर एक शेर पैदा हुआ है, तो मैं भी किसी शेर से कम नहीं हूं।” बस फिर क्या था, बेटे के जन्म की उस असीम खुशी और जोश में महानायक ने बिना किसी डर के उस खूंखार बाघ के साथ बेहद शानदार और दमदार शॉट्स दिए।
बिना ट्रेंड किए गए बाघ और स्टंटमैन का दर्दनाक अनुभव
यह किस्सा जितना रोमांचक है, उतना ही उस दौर के एक्शन कलाकारों के संघर्ष और दर्द को भी बयां करता है। मोहन ने खुलासा किया कि उस समय फिल्मों में इस्तेमाल होने वाले बाघों को विधिवत ट्रेनिंग नहीं दी जाती थी, बल्कि कई बार उनके मुंह तक सिल दिए जाते थे, जिससे वे झुंझलाकर और ज्यादा आक्रामक हो जाते थे। शूटिंग के दौरान मोहन खुद उस बाघ के हमले का शिकार होकर बुरी तरह घायल और बेहोश हो गए थे, जिनके चेहरे पर आज भी उस संघर्ष के निशान मौजूद हैं। इसके बावजूद, अमिताभ बच्चन और उन स्टंट्समैन की मेहनत ने ‘खून पसीना’ के उस दृश्य को हमेशा के लिए सिनेमाई इतिहास में अमर कर दिया।
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