बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के परिणाम ने सभी सियासी समीकरणों को पूरी तरह से उलट कर रख दिया है। इस हाई-प्रोफाइल उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने शानदार जीत हासिल करते हुए भारतीय जनता पार्टी के तीन दशक के लंबे वर्चस्व को तहस-नहस कर दिया है। बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में इस करारी हार के बाद सियासी गलियारों में मंथन का दौर शुरू हो गया है। पार्टी के भीतर और बाहर इस बात पर गंभीर चर्चा हो रही है कि आखिर इतने मजबूत किले में सेंध कैसे लगी और इस हार के पीछे असली वजह क्या रही।
‘कुत्ता-बिल्ली’ वाला वह वायरल बयान जिसने पलटा चुनावी पासा
चुनावी प्रचार के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो आग की तरह फैल गया, जिसमें दावा किया गया कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने बांकीपुर के मतदाताओं को लेकर विवादित टिप्पणी की है। वीडियो में कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया कि अगर पार्टी किसी कुत्ता-बिल्ली को भी मैदान में उतार दे, तो भी वह आसानी से जीत जाएगी। प्रशांत किशोर ने इस कथित बयान को अपने प्रचार का मुख्य हथियार बनाया और हर नुक्कड़ सभा में इसे जोर-शोर से उठाया। जनता के बीच यह संदेश गया कि बीजेपी अपने मतदाताओं को हल्के में ले रही है और उनका अपमान कर रही है, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी फैल गई।
बयान की सच्चाई: एडिटेड वीडियो और रविशंकर प्रसाद का खंडन
जब इस वायरल बयान की तह तक जाकर पड़ताल की गई, तो सामने आया कि सोशल मीडिया पर शेयर किया गया वह वीडियो पूरी तरह से एडिटेड और भ्रामक था। खुद बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि उनका ऐसा कोई बयान नहीं था और यह पूरी तरह से बेबुनियाद तथा मनगढ़ंत है। उन्होंने साफ कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने हर एक कार्यकर्ता और आम जनता का बेहद सम्मान करती है। हालांकि, तकनीकी रूप से यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि इस वीडियो को किसने एडिट किया, लेकिन चुनाव के ठीक पहले फैले इस दुष्प्रचार ने बीजेपी की लुटिया डुबोने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
जनता का आक्रोश और बीजेपी के लिए बड़ा सबक
प्रशांत किशोर द्वारा इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठाए जाने के बाद बांकीपुर के मतदाताओं का मिजाज पूरी तरह बदल गया। जनता ने इस कथित अहंकार भरे बयान को अपने स्वाभिमान से जोड़ लिया और मतदान के दिन मतपेटी के जरिए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस एक वायरल वीडियो और उससे उपजे जन-आक्रोश ने बीजेपी के पारंपरिक वोटों में भारी सेंधमारी की। फिलहाल, बीजेपी इस पूरे प्रकरण की अंदरूनी सच्चाई का पता लगाने और अपनी रणनीति की समीक्षा करने में जुटी है, लेकिन तब तक यह चुनाव राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय लिख चुका है।
