देश की सबसे बड़ी अदालत Supreme Court of India में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी को चौंका दिया। सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि रिश्वत के रूप में जब्त किए गए नोट ‘चूहों द्वारा नष्ट’ कर दिए गए। इस पर कोर्ट ने आश्चर्य जताया और कहा कि ऐसी बातों पर आसानी से भरोसा करना मुश्किल है। मामला बिहार की एक महिला अधिकारी से जुड़ा है, जिन पर रिश्वत लेने का आरोप है। कोर्ट ने फिलहाल उनकी सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी है।
कौन हैं आरोपी और क्या है पूरा मामला
यह मामला बिहार की अधिकारी Aruna Kumari से जुड़ा है, जो चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर (CDPO) के पद पर कार्यरत थीं। उन पर 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ था। जांच के दौरान कथित रूप से रिश्वत की रकम भी बरामद की गई थी, जो बाद में विवाद का मुख्य कारण बन गई।
ट्रायल कोर्ट से राहत, हाईकोर्ट ने सुनाई सजा
इस केस में पहले ट्रायल कोर्ट ने अरुणा कुमारी को बरी कर दिया था, लेकिन बाद में Patna High Court ने इस फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए अलग-अलग धाराओं में तीन से चार साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, जब्त किए गए नोट अदालत में पेश नहीं किए जा सके। इसके पीछे वजह बताई गई कि नोट ‘चूहों द्वारा खराब’ हो गए थे। हाईकोर्ट ने माना कि भले ही नोट मौजूद न हों, लेकिन रिकॉर्ड के आधार पर आरोप साबित हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और आगे की सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस दलील पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसे स्पष्टीकरण से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने फिलहाल सजा पर रोक लगाते हुए अरुणा कुमारी को जमानत दे दी है और कहा कि इस मामले की विस्तृत सुनवाई बाद में की जाएगी। इस फैसले ने एक बार फिर सबूतों के रखरखाव और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर है, जहां इस पूरे मामले की गहराई से जांच होगी।
Read more-IPL 2026 में रनों की बौछार… राहुल-नितीश के दम पर दिल्ली में ठोक डाले 264 रन, रच दिया इतिहास
