UP News: उत्तर प्रदेश के Ghazipur जिले के सैदपुर थाना क्षेत्र के मुरादचक गांव से सामने आए एक मामले ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सड़क किनारे छोटी सी गुमटी में पान बेचकर परिवार का गुजारा करने वाले सुरेंद्र कश्यप की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि वे लंबे समय से भारी बिजली बिल और वसूली के दबाव से परेशान थे। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और स्थानीय लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने मौके से मिले दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
कैसे बढ़कर 1.85 लाख रुपये तक पहुंचा बकाया?
परिजनों के अनुसार, करीब एक साल पहले बिजली विभाग की विजिलेंस टीम ने सुरेंद्र की दुकान पर कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई के बाद उन पर लगभग 1.12 लाख रुपये का जुर्माना और बकाया बिल लगाया गया। परिवार का कहना है कि सीमित आमदनी वाले एक छोटे दुकानदार के लिए इतनी बड़ी राशि चुकाना संभव नहीं था। बाद में मामला तहसील पहुंचा और रिकवरी सर्टिफिकेट जारी होने के बाद यह रकम बढ़कर करीब 1.85 लाख रुपये हो गई। बताया जा रहा है कि सुरेंद्र कई महीनों से अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे थे और बकाया राशि में राहत की मांग कर रहे थे।
परिजनों ने लगाए मानसिक दबाव के आरोप
मृतक के परिवार का आरोप है कि उन्हें लगातार भुगतान के लिए दबाव का सामना करना पड़ रहा था। परिजनों का कहना है कि राजस्व और बिजली विभाग से जुड़े कर्मचारी कई बार दुकान पर पहुंचे और बकाया जमा करने के लिए कहा। परिवार के मुताबिक, आर्थिक तंगी के बीच यह दबाव लगातार बढ़ता गया। सुरेंद्र की पत्नी ने बताया कि वे पिछले कुछ समय से गहरे तनाव में थे। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर थी और बेटियों की शादी की चिंता भी उन्हें परेशान कर रही थी। परिजनों का आरोप है कि मदद मिलने के बजाय उन्हें सिर्फ नोटिस और भुगतान के लिए कहा गया।
जांच शुरू, जवाब का इंतजार
घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मौके से मिले सुसाइड नोट और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। वहीं, स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि क्या वाकई वसूली का दबाव इस घटना की वजह बना। यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन छोटे कारोबारियों की मुश्किलों को भी सामने लाता है, जो आर्थिक संकट और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच खुद को असहाय महसूस करते हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
