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NEET UG 2026 पेपर लीक का सबसे बड़ा राज! 10 दिन की CBI रिमांड में कुलकर्णी और मनीषा, अब खुलेंगे देशभर के नेटवर्क के तार

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे को कोर्ट ने 10 दिन की CBI रिमांड में भेजा। जांच एजेंसी अब देशभर में फैले पेपर लीक नेटवर्क और बड़े आरोपियों की तलाश में जुटी है।

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NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में अब जांच तेजी से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले के दो अहम आरोपियों पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे को 10 दिनों की सीबीआई रिमांड में भेज दिया है। सीबीआई ने अदालत में दावा किया कि दोनों आरोपी लंबे समय से एक-दूसरे के संपर्क में थे और परीक्षा पेपर लीक करने वाले नेटवर्क का हिस्सा हैं। एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई राज्यों तक फैले हुए हैं। इसी वजह से दोनों आरोपियों से अलग-अलग जगहों पर ले जाकर पूछताछ करना जरूरी है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने 14 दिन की कस्टडी की मांग की थी, लेकिन अदालत ने फिलहाल 10 दिन की रिमांड मंजूर की। अब माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

प्रोफेसर कुलकर्णी पर सीबीआई का बड़ा दावा

सीबीआई ने अदालत में कहा कि पीवी कुलकर्णी पेशे से रसायन विज्ञान के प्रोफेसर हैं और जांच में उन्हें इस पूरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है। एजेंसी के अनुसार, कुलकर्णी की भूमिका केवल प्रश्न तैयार करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि पेपर लीक की पूरी प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी की आशंका है। सीबीआई अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किन लोगों तक पहुंचाया गया और इसके बदले कितनी रकम का लेनदेन हुआ। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि डिजिटल सबूत, मोबाइल डेटा और संपर्कों की कड़ियां जोड़ने के लिए आरोपियों से लगातार पूछताछ जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ बचाव पक्ष ने दावा किया कि कुलकर्णी ने सिर्फ प्रश्न तैयार कर जमा किए थे और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि वही सवाल अंतिम प्रश्नपत्र में शामिल किए गए हैं। वकील ने अदालत में कहा कि केवल प्रश्न तैयार करना किसी को पेपर लीक का आरोपी साबित नहीं करता। हालांकि सीबीआई ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि जांच के शुरुआती सबूत आरोपियों की भूमिका को गंभीर बना रहे हैं।

मनीषा वाघमारे की गिरफ्तारी पर उठा विवाद

सुनवाई के दौरान मनीषा वाघमारे की ओर से पेश वकील ने सीबीआई की हिरासत की मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि पुणे पुलिस ने मनीषा को 24 घंटे से ज्यादा समय तक हिरासत में रखा, जो कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ है। वकील ने अदालत में यह भी कहा कि एजेंसी के पास अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं है और केवल बयान के आधार पर कस्टडी मांगी जा रही है। बचाव पक्ष का कहना था कि मोबाइल फोन पहले से सीबीआई के कब्जे में है, इसलिए आगे की हिरासत का कोई औचित्य नहीं बनता। हालांकि सीबीआई ने अदालत को बताया कि मनीषा वाघमारे को 14 मई को गिरफ्तार किया गया था और अगले दिन ट्रांजिट रिमांड के जरिए दिल्ली लाया गया। एजेंसी ने कहा कि गिरफ्तारी पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था और बाद में दोनों आरोपियों को 10 दिन की सीबीआई रिमांड में भेजने का आदेश दे दिया।

अब खुल सकते हैं कई बड़े नाम

सीबीआई की अगली जांच अब इस बात पर केंद्रित होगी कि पेपर लीक का नेटवर्क किन-किन राज्यों में सक्रिय था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच एजेंसी को शक है कि इस गिरोह में शिक्षा जगत, कोचिंग नेटवर्क और तकनीकी माध्यमों से जुड़े कई लोग शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। सीबीआई डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और पैसों के लेनदेन की जानकारी खंगाल रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक का फायदा किन छात्रों को पहुंचाया गया और परीक्षा की गोपनीयता किस स्तर पर टूट गई। इस मामले ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि NEET जैसी बड़ी परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब सभी की नजर सीबीआई की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि माना जा रहा है कि यह जांच देश के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों में से एक का खुलासा कर सकती है।

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