वृंदावन में सोमवार तड़के उस समय भावुक माहौल बन गया, जब हजारों श्रद्धालुओं को अचानक पता चला कि प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज पदयात्रा के लिए बाहर नहीं आएंगे। हर रोज की तरह भक्त रात से ही सड़क किनारे खड़े होकर महाराजजी के दर्शन का इंतजार कर रहे थे। लोगों को उम्मीद थी कि सुबह करीब 3 बजे महाराजजी अपनी नियमित पदयात्रा पर निकलेंगे, लेकिन इस बार आश्रम की ओर से ऐसी सूचना दी गई जिसने सभी को चिंता में डाल दिया। केली कुंज आश्रम के शिष्यों ने लाउडस्पीकर से घोषणा करते हुए बताया कि प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए उनकी पदयात्रा और एकांतिक दर्शन अगले आदेश तक स्थगित किए जा रहे हैं। यह खबर सुनते ही वहां मौजूद हजारों भक्त मायूस हो गए और बिना दर्शन किए वापस लौटने लगे।
21 साल से बीमारी से जूझ रहे हैं महाराज, डॉक्टरों ने दी आराम की सलाह
आश्रम प्रशासन के मुताबिक प्रेमानंद महाराज लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं। बताया गया कि पिछले करीब 21 वर्षों से उनका इलाज चल रहा है और हाल के दिनों में स्वास्थ्य ज्यादा कमजोर हो गया है। डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है, जिसके बाद आश्रम ने सभी धार्मिक कार्यक्रम सीमित करने का फैसला लिया। प्रेमानंद महाराज इन दिनों रोजाना रात में करीब डेढ़ किलोमीटर की पदयात्रा करते थे। वह केली कुंज आश्रम से सौभरी वन तक पैदल जाते थे और रास्ते में हजारों श्रद्धालु उनके दर्शन करते थे। सामान्य दिनों में करीब 20 हजार लोग दर्शन के लिए पहुंचते थे, जबकि वीकेंड और विशेष पर्वों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती थी। अचानक कार्यक्रम बंद होने की खबर ने भक्तों को भावुक कर दिया है।
दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु लौटे निराश, भक्तों ने की प्रार्थना
प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से लोग वृंदावन पहुंचते हैं। रविवार रात भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे थे। बाराबंकी से आए श्रद्धालु राजू गुप्ता ने बताया कि वह परिवार के साथ दर्शन के लिए आए थे, लेकिन आश्रम से जानकारी मिली कि महाराजजी स्वास्थ्य कारणों से बाहर नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि सभी भक्त अब सिर्फ उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं श्रद्धालु पुष्पा गुप्ता ने बताया कि वह कई दिनों से दर्शन की योजना बना रही थीं, लेकिन अचानक कार्यक्रम रद्द होने से निराशा हुई। हालांकि भक्तों का कहना है कि महाराजजी का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है और वह जल्द स्वस्थ होकर फिर से भक्तों के बीच लौटें, यही सभी की कामना है। आश्रम के बाहर देर रात तक भक्त भजन गाते और प्रार्थना करते दिखाई दिए।
13 साल की उम्र में छोड़ा घर, ऐसे बने राधावल्लभी संत
प्रेमानंद महाराज का जीवन भी काफी प्रेरणादायक माना जाता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। बचपन में उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। परिवार में धार्मिक माहौल होने के कारण उनका मन शुरू से ही अध्यात्म की ओर झुका रहा। बताया जाता है कि बचपन में उन्होंने गांव में शिव मंदिर के लिए चबूतरा बनाने की कोशिश की थी, लेकिन विरोध मिलने पर उनका मन आहत हो गया और उन्होंने कम उम्र में ही घर छोड़ दिया। इसके बाद वह वृंदावन पहुंच गए और भक्ति मार्ग में पूरी तरह समर्पित हो गए। वृंदावन में रोज बांके बिहारी मंदिर के दर्शन करते-करते उनका जुड़ाव राधावल्लभ संप्रदाय से हुआ। एक श्लोक के अर्थ को जानने की जिज्ञासा ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और बाद में उन्होंने राधावल्लभ परंपरा को अपना लिया। आज प्रेमानंद महाराज देशभर में लाखों श्रद्धालुओं के बीच आध्यात्मिक गुरु के रूप में जाने जाते हैं और उनकी एक झलक पाने के लिए लोग घंटों इंतजार करते हैं।
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