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8 बार विधायक, मंत्री और नेता प्रतिपक्ष… अब नहीं रहे सपा नेता रामगोविंद चौधरी, आखिरी मुलाकात में अखिलेश से कही थी ये बात

सपा के वरिष्ठ नेता और 8 बार के विधायक Ram Govind Chaudhary का 74 साल की उम्र में PGI अस्पताल में निधन हो गया। जानिए उनका राजनीतिक सफर और मुलायम सरकार में निभाई भूमिका।

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Ram Govind Chaudhary: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी (Ram Govind Chaudhary) का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने PGI अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही समाजवादी पार्टी के नेताओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। कुछ दिन पहले ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अस्पताल में उनसे मिलने पहुंचे थे। उस दौरान रामगोविंद चौधरी (Ram Govind Chaudhary)  ने अपनी इच्छा जाहिर की थी कि वह अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।

अखिलेश और शिवपाल समेत कई नेताओं ने जताया दुख

रामगोविंद चौधरी (Ram Govind Chaudhary) के निधन पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए शोक व्यक्त किया। उन्होंने उन्हें पार्टी का वरिष्ठ नेता बताते हुए श्रद्धांजलि दी और परिवार को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति मिलने की कामना की। सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने भी उनके निधन को बेहद दुखद बताया। वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी पूर्व मंत्री और पूर्व नेता प्रतिपक्ष के निधन पर संवेदना व्यक्त की।

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छात्र राजनीति से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर

रामगोविंद चौधरी (Ram Govind Chaudhary) का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। 7 सितंबर 1953 को बलिया के गोसाईपुर गांव में जन्मे चौधरी ने ग्रेजुएशन के बाद एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। वह जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से भी जुड़े रहे और आपातकाल के दौरान जेल गए। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बनाई और लंबे समय तक विधानसभा में जनता का प्रतिनिधित्व किया।

1977 में पहली बार जीता था विधानसभा चुनाव

रामगोविंद चौधरी (Ram Govind Chaudhary) ने 1977 में चिलकहर विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में कदम रखा था। इसके बाद 1980, 1985 और 1989 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। कुल मिलाकर वह 8 बार विधायक रहे। मुलायम सिंह यादव की सरकार में उन्होंने मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली। वर्ष 2017 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। उनके निधन को समाजवादी पार्टी के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

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