राजस्थान के डूंगरपुर जिले से सरकारी छात्रावासों की व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। कुंआ कस्बे स्थित नाना भाई खांट राजकीय जनजाति बालक छात्रावास में बच्चों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। चौरासी विधानसभा क्षेत्र से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक अनिल कटारा ने बिना पूर्व सूचना के छात्रावास का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया। बच्चों के लिए रखे गए खाद्यान्न की गुणवत्ता बेहद खराब बताई गई। विधायक ने मौके पर ही व्यवस्था की जांच की और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। इस घटना के बाद छात्रावास की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठने लगे हैं।
अनाज में मिले कीड़े और कंकड़
निरीक्षण के दौरान विधायक ने छात्रावास के स्टोर रूम का भी जायजा लिया। जांच में गेहूं और चावल की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। बताया गया कि अनाज में बड़ी मात्रा में कंकड़ मौजूद थे और उसमें छोटे-छोटे कीड़े भी दिखाई दिए। ऐसी स्थिति में यही खाद्यान्न बच्चों के भोजन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। यह देखकर विधायक ने नाराजगी जताई और कहा कि बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन मिलना उनका अधिकार है। खराब गुणवत्ता वाले अनाज के इस्तेमाल से बच्चों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। इस मामले के सामने आने के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भी चिंता बढ़ गई है कि आखिर सरकारी छात्रावासों में खाद्य सामग्री की नियमित जांच क्यों नहीं हो रही थी।
विधायक ने अधिकारियों को लगाई फटकार
खामियां सामने आने के बाद विधायक अनिल कटारा ने मौके पर मौजूद समाज कल्याण विभाग और छात्रावास प्रशासन के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने साफ कहा कि बच्चों की सेहत के साथ किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। विधायक ने जिम्मेदार अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उनके औचक निरीक्षण के बाद संबंधित विभाग में भी हलचल तेज हो गई। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर
इस घटना के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने दिनों तक खराब गुणवत्ता वाला अनाज बच्चों तक कैसे पहुंचता रहा। यदि समय पर निरीक्षण नहीं होता, तो यह लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य के लिए और गंभीर साबित हो सकती थी। अब स्थानीय लोगों और अभिभावकों की नजर जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग की कार्रवाई पर टिकी है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। साथ ही छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी भी बच्चे की सेहत के साथ इस तरह का जोखिम न उठाया जाए।
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