मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने लोगों से कानून का सम्मान करने और किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में न लेने की अपील की है। मायावती ने कहा कि किसी भी अन्याय के खिलाफ लड़ाई लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से लड़ी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को भावनाओं में बहकर ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए, जिससे स्थिति और ज्यादा खराब हो जाए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब इस मामले को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज है।
राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को भड़काने का आरोप
मायावती ने बिना किसी पार्टी का नाम लिए कहा कि कुछ राजनीतिक संगठन और दल अपने फायदे के लिए लोगों को भड़काते हैं। उनके अनुसार, कई बार लोगों को सड़कों पर उतरने, प्रदर्शन करने और विरोध के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे तनाव और अव्यवस्था का माहौल बन जाता है। उन्होंने कहा कि बाद में वही नेता घटनास्थल पर पहुंचकर सहानुभूति दिखाते हैं, लेकिन इससे पीड़ित परिवारों को वास्तविक न्याय नहीं मिल पाता। बसपा प्रमुख का कहना है कि ऐसे हालात में सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को होता है, जिनके लिए न्याय की मांग उठाई जा रही होती है। इसलिए लोगों को सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए।
बाबा साहब और कांशीराम के रास्ते पर चलने की सलाह
बसपा सुप्रीमो ने अपने बयान में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने हमेशा संवैधानिक और कानूनी रास्ते से अधिकारों की लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कभी हिंसा या अराजकता का रास्ता नहीं अपनाया। मायावती ने कहा कि कांशीराम ने भी समाज के कमजोर वर्गों को संगठित कर लोकतांत्रिक तरीके से उनकी आवाज बुलंद की थी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एकजुट होकर लोकतंत्र और मतदान की ताकत का इस्तेमाल करें, क्योंकि यही बदलाव और न्याय का सबसे प्रभावी माध्यम है। उनके अनुसार, समाज को भावनाओं में बहने के बजाय अपने अधिकारों के लिए संवैधानिक रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।
क्या है ललिता गौतम हत्याकांड का पूरा मामला?
मेरठ की रहने वाली 20 वर्षीय ललिता गौतम के लापता होने के बाद उसका शव कुछ दिनों बाद बरामद हुआ था। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसने कथित तौर पर अपराध स्वीकार भी किया है। हालांकि, मृतका के परिवार का आरोप है कि इस घटना में और भी लोग शामिल हो सकते हैं और मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर हाल के दिनों में कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद भी हुआ, जिसके बाद मामला और चर्चा में आ गया। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ऐसे माहौल में मायावती का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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