लखनऊ में एसबीआई बैंक के फील्ड ऑफिसर द्वारा बैंककर्मी पत्नी दिव्या मिश्रा और अपनी बहन की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुदकुशी करने का मामला बेहद तूल पकड़ चुका है। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद मृतका दिव्या मिश्रा की बहन और जानी-मानी पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा का दर्द सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आया है। प्रज्ञा ने एक लंबा और भावुक फेसबुक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि उनकी बहन का शव फिलहाल पोस्टमॉर्टम हाउस के फ्रीजर में रखा हुआ है। सबसे दिल दहलाने वाली बात यह है कि वह अपनी बुजुर्ग मां को अभी तक इस सच का सामना कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाई हैं। मां को यह कहकर बहलाया गया है कि दिव्या की हालत अभी क्रिटिकल है, और इसी झूठे दिलासे के सहारे उन्हें बगल में सुलाया गया है। प्रज्ञा के मुताबिक, जिंदगी में पहली बार उन्हें यह अहसास हुआ है कि किसी अपने को सच बताना कितना ज्यादा मुश्किल और पीड़ादायक होता है।
ब्लिंकिट के टमाटर से लेकर सुहागरात के खर्चों तक, पति की हैवानियत के खुलासे
प्रज्ञा मिश्रा ने अपने पोस्ट में आरोपी पति मानस की घिनौनी मानसिकता और क्रूरता की परतें खोली हैं। उन्होंने बताया कि हत्यारे ने मरने से पहले अपने स्टेटस में उनका नाम लिखकर यह दावा किया था कि उन्हें सब कुछ पता था। प्रज्ञा ने इस बात को स्वीकार किया कि हां, उन्हें पता था कि मानस उनकी बहन के साथ किस हद तक क्रूरता करता था, जिसके चलते दिव्या उससे कानूनी रूप से अलग होना चाहती थी। उन्होंने एक हैरान करने वाला किस्सा साझा करते हुए बताया कि ब्लिंकिट से मंगाए गए पैकेट में यदि कोई टमाटर खराब निकल जाता था, तो आरोपी दिव्या को इस बात पर पीटता था कि उसने ऐप पर ऑर्डर ही क्यों किया। इसके अलावा, शादी की सुहागरात पर ही आरोपी ने घर के खर्चों की एक बकायदा फेहरिस्त तैयार कर ली थी और आधा खर्च उठाने की शर्त रखी थी, जिसे दिव्या ने अपनी सहूलियत और समझौते के तहत खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया था।
प्रज्ञा मिश्रा के तीखे सवाल: बैंक तक रिवॉल्वर कैसे पहुंची और ऑटो वाला कौन था?
इस पूरे हत्याकांड की कड़ियों को जोड़ते हुए प्रज्ञा मिश्रा ने पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने कई गंभीर और बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज का जिक्र करते हुए पूछा कि बैंक के बाहर जब यह खूनी खेल चल रहा था, तब वहां मौजूद बैंक कर्मचारियों की भीड़ भाग रही थी और आरोपी सरेआम गोलियां बरसा रहा था। सवाल यह उठता है कि बैंक के अंदर काम करने वाले एक कर्मचारी के पास एक साथ तीन-तीन रिवॉल्वर कहां से आईं, उसे हथियार किसने मुहैया कराए और उसे इस जघन्य अपराध को अंजाम देने के लिए किसने प्रेरित किया? प्रज्ञा ने इस बात पर भी जोर दिया कि आरोपी कार चलाना नहीं जानता था, ऐसे में उसके कार से आने-जाने की थ्योरी पूरी तरह गलत है। वह ऑटो से आया था और ऑटो से ही भागा था, जिसका मतलब साफ है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति भी पर्दे के पीछे शामिल था।
पत्रकारिता पर सियासत करने वालों को दो टूक जवाब और आखिरी उम्मीदें
हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया और मीडिया गलियारों में चल रही राजनीति पर भी प्रज्ञा मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि साल 2017 से पहले की पत्रकारिता करने वालों में वह खुद को सबसे अनुभवी मानती हैं, लेकिन कुछ हमपेशा लोग इस दुखद घटना में भी अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हुए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्होंने कभी ऐसी पत्रकारिता नहीं की जिससे नजरें नीची करनी पड़ें। उन्होंने अपने और दिव्या के बीच के संघर्ष को याद करते हुए बताया कि कुछ दिन पहले ही स्ट्रेस की वजह से दिव्या का एक्सीडेंट हुआ था, जिसके बाद उसका हाथ-पैर टूट गया था और वह लंगड़ाकर चलने को मजबूर थी। तमाम प्रताड़नाएं सहने के बावजूद दिव्या ने तीज का व्रत रखने की तैयारी की थी और हाथ पर पति का टैटू तक नहीं मिटाया था, क्योंकि वह भीतर से चाहती थी कि सब कुछ ठीक हो जाए। फिलहाल, पुलिस इस मामले के हर एक पहलू की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस दोहरे हत्याकांड के पीछे छिपे असली सच से पर्दा उठ सके।
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