दिल्ली में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है, जहां एक तरफ विपक्षी दल अपनी मांगों को लेकर मुखर हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक कार्रवाई भी तेज हो गई है। हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे ‘इंडिया’ ब्लॉक के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इस कार्रवाई के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है और विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
आकाशवाणी भवन परिसर में हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा
घटना की शुरुआत उस समय हुई जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, और कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा व केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में तमाम सांसद आकाशवाणी भवन परिसर में शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। डीसीपी सचिन शर्मा के नेतृत्व में भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और प्रदर्शनकारियों से जगह खाली करने की अपील की। जब नेताओं ने धरना समाप्त करने से इनकार किया, तो पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।
विपक्ष का आक्रोश और आगे की रणनीति
इस पूरी घटना के बाद विपक्षी दलों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार हर नागरिक को है, लेकिन प्रशासन द्वारा इस तरह की कार्रवाई करना तानाशाही रवैया है। इस हाई-प्रोफाइल हिरासत के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक तूल पकड़ सकता है।
