कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर कानूनी विवाद को लेकर चर्चा में हैं। भगवान राम को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़े मामले में वाराणसी की सांसद-विधायक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज शिकायत को पहले खारिज कर दिया गया था। अब यह मामला दोबारा निचली अदालत में सुना जाएगा। कोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी की कानूनी चुनौतियां बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं। यह मामला पिछले साल अमेरिका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान से जुड़ा बताया जा रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
शिकायत के अनुसार राहुल गांधी ने अमेरिका के बोस्टन स्थित एक विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भगवान राम का उल्लेख करते हुए उन्हें एक पौराणिक व्यक्ति बताया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बयान से करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। इसी आधार पर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। हालांकि, राहुल गांधी ने अपने बयान में भगवान राम को करुणा, क्षमा और धर्म का प्रतीक भी बताया था। इसके बावजूद बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया और मामला अदालत तक पहुंच गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक मंचों से की गई टिप्पणियों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
पहले क्यों खारिज हुई थी शिकायत?
इस मामले की सुनवाई पहले वाराणसी की एक निचली अदालत में हुई थी। उस समय अदालत ने शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि कथित बयान भारत के बाहर दिया गया था। ऐसे मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक हो सकती है। इसी आधार पर शिकायत को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया गया था। लेकिन शिकायतकर्ता की ओर से इस फैसले को चुनौती दी गई और उच्च स्तर की अदालत में पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। इसके बाद मामले की फिर से सुनवाई हुई और अदालत ने निचली अदालत के आदेश पर सवाल उठाए।
अब आगे क्या होगा?
सांसद-विधायक अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत दर्ज करने या शुरुआती स्तर पर मामले पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि राहुल गांधी सांसद हैं, लेकिन इस मामले में उन्हें ऐसा लोक सेवक नहीं माना जा सकता जिसके खिलाफ कार्रवाई के लिए विशेष मंजूरी अनिवार्य हो। इसी आधार पर पहले दिया गया आदेश रद्द कर दिया गया। अब निचली अदालत को निर्देश दिया गया है कि वह मामले के तथ्यों और कानून के आधार पर दोबारा सुनवाई करे और उचित फैसला सुनाए। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला फिर से अदालत में चर्चा का विषय बन सकता है और सभी की नजर अगली सुनवाई पर रहेगी।
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