गुजरात के बनासकांठा जिले का वाडिया गांव लंबे समय से एक ऐसी सामाजिक समस्या से जूझ रहा है, जिसने यहां की कई महिलाओं और लड़कियों की जिंदगी को प्रभावित किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 750 आबादी वाले इस गांव में सरानिया समुदाय के कुछ परिवारों में लंबे समय तक महिलाओं को देह व्यापार में धकेले जाने की परंपरा रही है। हालात से बचने के लिए कुछ परिवार अपनी बेटियों की कम उम्र में सगाई या शादी कर देते हैं। गांव में यह धारणा रही है कि शादी या सगाई के बाद लड़कियों को इस काम में नहीं लगाया जाएगा। हालांकि, कम उम्र में सगाई भी बाल अधिकारों और शिक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है।
बेटियों को बचाने के लिए परिवारों ने अपनाया दूसरा रास्ता
गांव की कुछ महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि गरीबी और रोजगार के सीमित साधनों ने इस समस्या को लंबे समय तक बनाए रखा। एक युवती की मां और दादी भी इसी काम से जुड़ी थीं, लेकिन परिवार ने उसे इससे दूर रखने की कोशिश की। उसकी महज 11 साल की उम्र में सगाई कर दी गई और बाद में उसकी शादी हुई। इसी तरह चंद्रा सरानिया ने भी अपनी बेटी की कम उम्र में सगाई कर दी थी। चंद्रा खुद बताती हैं कि उन्हें 15 साल की उम्र में देह व्यापार में धकेल दिया गया था। अब वह अपनी आजीविका के लिए छोटी डेयरी चलाती हैं। ऐसे अनुभवों के बीच कई परिवार अपनी बेटियों के लिए शिक्षा और गांव से बाहर बेहतर जीवन का रास्ता तलाश रहे हैं।
सामूहिक विवाह से बदलाव की कोशिश
वाडिया में बदलाव की कोशिशों को 2012 के बाद गति मिली। सामाजिक संगठन विचरता समुदाय समर्थन मंच (VSSM) ने परिवारों को बेटियों को देह व्यापार से दूर रखने के लिए जागरूक करना शुरू किया और सामूहिक विवाह का आयोजन कराया। इसके बाद ऐसे आयोजनों की परंपरा आगे बढ़ी। संगठन से जुड़ी मित्तल पटेल के अनुसार, शुरुआत में परिवारों को समझाना मुश्किल था, लेकिन लगातार प्रयासों से बदलाव आया। वाडिया की समस्या को समुदाय के इतिहास और आजादी के बाद पैदा हुए रोजगार संकट से भी जोड़ा जाता है। हालांकि परिस्थितियां बदल रही हैं, लेकिन गांव के सामने शिक्षा, बाल विवाह और महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार जैसे सवाल अब भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
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