दक्षिण भारत की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मुख्य चेहरा बन चुके पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। अन्नामलाई ने दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना पांच पन्नों का एक विस्तृत इस्तीफा सौंपा। राजनीति के गलियारों में इस बात की सुगबुगाहट तो काफी समय से थी, लेकिन अचानक उठाए गए इस कदम ने पूरी सियासी बिसात को हिलाकर रख दिया है। अपनी बेबाक बयानबाजी और धारदार तर्कों के लिए मशहूर अन्नामलाई का यह फैसला तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।
23 की उम्र में खाकी और फिर ‘सिंघम’ की पहचान
करूर जिले के एक साधारण परिवार में 4 जून 1984 को जन्मे के. अन्नामलाई की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी रही है। इंजीनियरिंग और फिर मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने देश की सबसे कठिन यूपीएससी परीक्षा पास की। साल 2011 में महज 23 साल की युवा उम्र में वह आईपीएस अधिकारी बन गए। कर्नाटक कैडर के इस जांबाज अफसर ने उडुपी और चिकमगलूर जैसे संवेदनशील जिलों में एसपी के तौर पर काम किया। अपराधियों के मन में खौफ और आम जनता के बीच उनकी बेहद ईमानदार और सख्त छवि के कारण लोग उन्हें ‘सुपर कॉप’ और ‘सिंघम’ कहने लगे। लेकिन साल 2019 में जब वे अपनी लोकप्रियता के चरम पर थे, तब उन्होंने अचानक खाकी को अलविदा कह दिया।
द्रविड़ राजनीति के गढ़ में भगवा बुलंद करने का सफर
पुलिस की नौकरी छोड़ने के बाद अन्नामलाई ने अगस्त 2020 में बीजेपी का दामन थामा। पार्टी ने उनकी काबिलियत को देखते हुए साल 2021 में उन्हें तमिलनाडु बीजेपी की कमान सौंप दी। द्रविड़ राजनीति के इस अभेद्य किले में, जहां बीजेपी को हमेशा एक बाहरी पार्टी के रूप में देखा जाता था, अन्नामलाई ने संगठन में नई जान फूंक दी। वे डीएमके (DMK) सरकार के सबसे मुखर विरोधी बनकर उभरे। भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और सनातन धर्म के मुद्दों पर उन्होंने राज्य सरकार को जमकर घेरा। लोकसभा चुनाव में बीजेपी आलाकमान ने अन्नामलाई के कहने पर ही एआईएडीएमके (AIADMK) से सालों पुराना गठबंधन तोड़ा था, जिससे राज्य में बीजेपी एक बड़ी ताकत बनकर उभरी।
नाराजगी की असली वजह और भविष्य की नई राह
सवाल उठता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि ‘सुपर कॉप’ को इस्तीफा देना पड़ा? दरअसल, हालिया विधानसभा चुनावों में एआईएडीएमके के दबाव के चलते बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने अन्नामलाई को चुनावी दंगल से थोड़ा दूर रखा। पार्टी के इस फैसले से वे भीतर ही भीतर नाराज चल रहे थे। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अन्नामलाई जैसा कड़क मिजाज नेता किसी के दबाव में काम करने के लिए तैयार नहीं था। अब चर्चाएं तेज हैं कि बीजेपी से राहें जुदा करने के बाद अन्नामलाई जल्द ही तमिलनाडु की मिट्टी से जुड़ी अपनी एक नई क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी का एलान कर सकते हैं, जो राज्य के आगामी समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख देगी।
