बिहार की राजनीति में बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पटना में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में कई बड़े नेताओं की मौजूदगी रही। इससे एक दिन पहले ही नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी थी। उन्होंने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंपा और कैबिनेट बैठक में मंत्रिपरिषद भंग करने की जानकारी दी।
डिप्टी सीएम से सीधे मुख्यमंत्री तक का सफर
सम्राट चौधरी का यह सफर बेहद दिलचस्प रहा है। वे पहले भी दो बार डिप्टी सीएम रह चुके हैं और पार्टी के मजबूत नेताओं में गिने जाते हैं। संगठन और सरकार दोनों में अनुभव रखने वाले सम्राट को अचानक मुख्यमंत्री बनाए जाने से राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। उनके साथ विजय कुमार चौधरी ने भी शपथ ली, जिससे संकेत मिलते हैं कि नई सरकार संतुलन साधने की कोशिश में है।
अंदरखाने चली रणनीति या मजबूरी का फैसला?
नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पहले से तय रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जबकि कुछ इसे दबाव की राजनीति का नतीजा बता रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस्तीफे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है। इस अचानक बदलाव ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर रोमांचक मोड़ पर ला खड़ा किया है।
नई सरकार से क्या उम्मीदें? जनता की नजरें टिकीं
अब सबकी नजरें नई सरकार पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी किस तरह राज्य को आगे बढ़ाते हैं। रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दे उनके सामने बड़ी चुनौती होंगे। वहीं, जनता यह भी जानना चाहती है कि क्या यह बदलाव स्थायी होगा या फिर आने वाले दिनों में राजनीति में और बड़े फेरबदल देखने को मिलेंगे।
