अंबेडकर जयंती के मौके पर एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक श्याम प्रकाश (Shyam Prakash) का बयान चर्चा का केंद्र बन गया है। गांधी भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने मंच से कहा कि “पत्थरों के आगे गिड़गिड़ाने से कुछ नहीं मिलेगा” और लोगों से जीवित नेतृत्व पर भरोसा करने की अपील की। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को “आज का भगवान” बताया। उनके इस बयान का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसे लेकर बहस छिड़ गई।
‘जीवित नेतृत्व पर भरोसा करें’—विधायक का संदेश
अपने संबोधन में विधायक श्याम प्रकाश (Shyam Prakash) ने कहा कि समाज को आगे बढ़ने के लिए ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो जमीन पर काम कर रहा हो और लोगों की समस्याओं को हल कर सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सिर्फ परंपराओं और मान्यताओं तक सीमित न रहें, बल्कि विकास और बदलाव को अपनाएं। उनके मुताबिक, आज के दौर में वही लोग ‘भगवान’ के समान हैं, जो समाज के लिए काम कर रहे हैं और जनता को लाभ पहुंचा रहे हैं। इस बयान को कुछ लोगों ने विकास की सोच से जोड़ा, जबकि कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देखा।
बयान पर बढ़ा विरोध, आस्था बनाम राजनीति की बहस तेज
जैसे ही श्याम प्रकाश (Shyam Prakash) का यह बयान इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ, कई लोगों ने इसकी आलोचना शुरू कर दी। विरोध करने वालों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है और आस्था का अपमान माना जा सकता है। वहीं कुछ लोगों ने इसे राजनीति से प्रेरित बयान बताते हुए सवाल उठाए कि क्या जनप्रतिनिधियों को इस तरह की तुलना करनी चाहिए। इस पूरे मामले ने ‘आस्था बनाम राजनीति’ की बहस को फिर से हवा दे दी है और सोशल मीडिया पर पक्ष-विपक्ष में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विवाद बढ़ने पर दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद विधायक श्याम प्रकाश (Shyam Prakash) ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाना था। उन्होंने कहा कि खासकर कुछ वर्गों में परंपराओं के नाम पर अंधविश्वास ज्यादा है, जिससे लोग विकास और शिक्षा से दूर हो जाते हैं। विधायक ने दोहराया कि उनका उद्देश्य लोगों को आगे बढ़ने और सही दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करना था, न कि किसी धर्म या पूजा पद्धति का विरोध करना।
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