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क्या बढ़ सकता है भरत तिवारी केस का तनाव? महापंचायत के बाद मंत्री का बड़ा बयान

भरत तिवारी मामले को लेकर भोजपुर में महापंचायत के बाद परिवार ने 1 हफ्ते का अल्टीमेटम दिया। मंत्री मिथिलेश तिवारी ने जांच का इंतजार करने और माहौल शांत रखने की अपील की है।

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भोजपुर जिले के बिलोटी गांव में भरत तिवारी की मौत के मामले को लेकर बुधवार को बड़ी महापंचायत हुई। इस बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और मृतक का परिवार शामिल हुआ। परिवार ने साफ कहा कि उन्हें सिर्फ न्याय चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। महापंचायत में यह फैसला लिया गया कि सरकार और प्रशासन को एक हफ्ते का समय दिया जाता है। अगर इस दौरान दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो बड़ा जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। परिवार का कहना है कि वे अब इस मामले को लेकर पीछे नहीं हटेंगे और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।

मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दिया शांति बनाए रखने का संदेश

इस पूरे मामले पर बिहार सरकार के मंत्री मिथिलेश तिवारी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि मामले की न्यायिक जांच पहले ही शुरू कर दी गई है, इसलिए सभी पक्षों को अब इंतजार करना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी तरह का माहौल खराब करने या लोगों को भड़काने की कोशिश न की जाए। मंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उनके अनुसार, जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया शुरू

मंत्री ने यह भी बताया कि मामले में प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई की गई है और कुछ पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है, जबकि एक डीएसपी को हटाने की भी प्रक्रिया हुई है। सरकार का कहना है कि हर स्तर पर निष्पक्ष जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल सभी संबंधित दस्तावेज और शिकायतों की जांच की जा रही है।

कई लोगों पर केस दर्ज, माहौल बना संवेदनशील

इस मामले को लेकर पहले से ही क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। बताया जा रहा है कि पुलिस की ओर से मृतक के परिवार के कुछ सदस्यों और अन्य लोगों पर भी एफआईआर दर्ज की गई है। कुल मिलाकर 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं परिवार का कहना है कि उन्हें किसी तरह का मुआवजा या नौकरी नहीं चाहिए, बल्कि केवल न्याय चाहिए। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कानून के तहत सभी मामलों की जांच की जा रही है। फिलहाल दोनों पक्षों की सख्त स्थिति के चलते मामला संवेदनशील बना हुआ है और सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है।

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