राजस्थान के जयपुर ग्रामीण इलाके में एक सरकारी स्कूल की हालत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रामपुरा कंवरपुरा ग्राम पंचायत का प्राथमिक स्कूल जर्जर होने के कारण दूसरी जगह शिफ्ट किया गया था। लेकिन स्कूल करीब 4 किलोमीटर दूर होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने लगी। इसके बाद गांव के ही एक व्यक्ति ने अपने तबेले में बच्चों को पढ़ाने के लिए जगह दे दी। इसी स्कूल की स्थिति देखने पहुंची CJP की टीम के साथ कथित मारपीट और हंगामे का मामला सामने आया है।
तबेले के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे
जानकारी के मुताबिक, स्कूल के लिए इस्तेमाल हो रहे इस स्थान पर रात में गाय-भैंस बांधी जाती हैं और चारा भी रखा जाता है। दिन में इसी जगह टीन शेड के नीचे बच्चों की कक्षाएं चलती हैं। यहां दो महिला शिक्षकों की नियुक्ति बताई गई है। ग्रामीण परिवारों के बच्चों को बदबू, गंदगी और सीमित सुविधाओं के बीच पढ़ाई करनी पड़ रही है। जर्जर स्कूल भवन को पहले ही बंद कर दिया गया था और वहां लोगों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई थी।
CJP टीम पहुंची तो ग्रामीणों से हुआ विवाद
स्कूल की बदहाली को सामने लाने के लिए CJP की टीम यहां पहुंची थी। टीम का आरोप है कि गांव में पहुंचते ही कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मारपीट की स्थिति बन गई। CJP का दावा है कि उसके कई कार्यकर्ताओं को चोट लगी और वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए। महिला कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी और मोबाइल फोन तोड़े जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने किसी पर हमला या पथराव नहीं किया, बल्कि केवल विरोध कर टीम को वहां से जाने के लिए कहा।
विधायक के समर्थकों पर भी लगाए गए आरोप
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद के पीछे स्थानीय विधायक कैलाश वर्मा के समर्थकों की भूमिका हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विवाद के बीच जर्जर स्कूल भवन पर विधायक से जुड़े पोस्टर भी नजर आए, जिनमें नई स्कूल बिल्डिंग के लिए 12 लाख रुपये की राशि की सिफारिश किए जाने का उल्लेख था। CJP ने मामले में 48 घंटे के भीतर कार्रवाई की मांग की है और कार्रवाई नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
हंगामे के बाद शिक्षा अधिकारी भी पहुंचे
घटना के बाद जिला शिक्षा अधिकारी गिरिराज पारीक मौके पर पहुंचे। इस दौरान स्कूल को लेकर कई सवाल खड़े हुए। आरोप है कि CJP टीम के वहां से जाने के बाद तबेले के बाहर एक बैनर भी लगा दिया गया, जिसमें आशुतोष रांका से सवाल पूछे गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि वे स्कूल के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद नहीं चाहते। वहीं CJP इसे सरकारी स्कूल की बदहाली को सामने लाने की कोशिश बता रही है। फिलहाल इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के आरोप सामने आए हैं और विवाद की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।
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