बिहार की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। हाल ही में हुए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के शुरुआती और लगातार रुझानों ने सबको चौंका दिया है। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं, जहां एक तरफ जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की शुरुआती बढ़त ने विरोधियों की नींद उड़ा दी है, वहीं दूसरी तरफ इस सियासी हलचल के बीच तमाम नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इस चुनाव परिणाम को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो चुका है और हर कोई यह जानने को बेताब है कि आने वाले दिनों में बिहार के राजनीतिक पटल पर इसके क्या दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे।
बीजेपी की करारी हार पर तेज प्रताप का तंज
बांकीपुर सीट पर चल रही मतगणना के दौरान जन सुराज समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बीच, जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने बयान में दावा किया कि बांकीपुर की जनता ने एक बहुत बड़ा संदेश दिया है और बीजेपी को यहां प्रचंड हार का सामना करना पड़ रहा है। तेज प्रताप यादव ने यहां तक कह डाला कि सत्ताधारी पार्टी अपने दिग्गज नेताओं और खुद के राष्ट्रीय अध्यक्ष की साख बचाने में भी नाकाम साबित होती दिख रही है, जिससे साफ होता है कि लोकतंत्र में जनता का फैसला ही सर्वोपरि होता है।
समर्थन और जश्न का माहौल
इस चुनावी रण में दिलचस्प मोड़ तब आया था जब तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी की तरफ से उम्मीदवार के तौर पर वीणा मानवी को मैदान में उतारा था, लेकिन किन्हीं कारणों से उनका नामांकन रद्द हो गया था। इसके बाद तेज प्रताप ने आगे आकर जन सुराज को समर्थन देने का ऐलान किया था और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने खुलकर समर्थन भी किया था। अब जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ रही है और प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए हुए हैं, वैसे-वैसे जन सुराज के दफ्तर और मतगणना स्थल के बाहर जश्न का माहौल शुरू हो गया है। कार्यकर्ता पीले रंग के गमछे और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर अपनी खुशी का इजहार कर रहे हैं।
बिहार की राजनीति पर बड़ा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव के यह शुरुआती परिणाम केवल एक सीट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह आने वाले समय में राज्य की मुख्यधारा की राजनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं। क्षेत्रीय मुद्दों और जनता के बीच बढ़ती उम्मीदों के बीच इस प्रकार के सियासी समीकरण नए विकल्पों की तलाश को बढ़ावा दे रहे हैं। फिलहाल, अंतिम और आधिकारिक नतीजों के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा, लेकिन जिस तरह से इस चुनाव ने राज्य की राजनीति का पारा चढ़ाया है, उससे यह स्पष्ट है कि बिहार का सियासी तापमान आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ने वाला है।
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