नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ तब आया जब 35 वर्षीय बालेंद्र शाह (Balendra Shah) ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। खास बात यह रही कि उनका शपथ ग्रहण रामनवमी के पावन अवसर पर हुआ, जिसे कई लोग एक नए युग की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें शीतल निवास में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। बालेंद्र शाह (Balendra Shah) अब नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं। उनकी पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP), ने हाल ही में हुए चुनावों में बड़ी जीत दर्ज की, जिससे उनका प्रधानमंत्री बनना लगभग तय हो गया था।
रैपर से नेता तक का सफर बना चर्चा का विषय
बालेंद्र शाह (Balendra Shah) का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। वे पहले एक लोकप्रिय रैपर के रूप में जाने जाते थे, लेकिन अब उन्होंने राजनीति में कदम रखकर बड़ा मुकाम हासिल किया है। शपथ लेने से पहले उन्होंने एक रैप गीत के जरिए जनता को संदेश दिया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस गीत में उन्होंने देश की एकता, युवा शक्ति और बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे देश के विकास में आगे आएं और नई सोच के साथ नेपाल को आगे बढ़ाएं। उनके इस अनोखे अंदाज ने उन्हें युवाओं के बीच और भी लोकप्रिय बना दिया है।
ऐतिहासिक जीत और पुराने नेताओं को बड़ा झटका
बालेंद्र शाह (Balendra Shah) की जीत केवल एक राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि एक बड़ा बदलाव भी मानी जा रही है। उन्होंने चुनाव में नेपाल के अनुभवी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हराकर सबको चौंका दिया। यह जीत उस जनआंदोलन के बाद आई, जिसने पूरे देश को हिला दिया था। सितंबर 2025 में हुए बड़े विरोध प्रदर्शन में कई लोगों की जान गई थी और इसके बाद सरकार गिर गई थी। यह आंदोलन पहले सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन बाद में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर व्यापक विरोध में बदल गया। इस माहौल ने जनता को बदलाव के लिए प्रेरित किया और बालेंद्र शाह इस बदलाव का चेहरा बनकर उभरे।
नई सरकार से उम्मीदें और चुनौतियां
पूर्व अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने भी अपने विदाई भाषण में नई सरकार पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि देश अब युवा नेतृत्व के हाथों में है और उनसे उम्मीद है कि वे भ्रष्टाचार खत्म करेंगे, रोजगार बढ़ाएंगे और सुशासन स्थापित करेंगे। हालांकि, बालेंद्र शाह (Balendra Shah) के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं—जैसे आर्थिक स्थिरता, राजनीतिक संतुलन और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना। नेपाल इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां पुरानी राजनीति और नई सोच के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या बालेंद्र शाह अपने वादों को पूरा कर पाएंगे और देश को एक नई दिशा दे पाएंगे।
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