रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पोलैंड के एक वरिष्ठ मंत्री के बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। पोलैंड के उप विदेश मंत्री व्लादिस्लाव टेओफिल बार्टोशेव्स्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि वैश्विक संकट के समय भारत ने संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभाई। उन्होंने दावा किया कि रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के दौरान जब हालात बेहद तनावपूर्ण थे, तब प्रधानमंत्री मोदी की सलाह और संवाद का असर देखने को मिला। मंत्री के अनुसार, दुनिया के कुछ चुनिंदा नेताओं में पीएम मोदी ऐसे नेता हैं जिनकी बात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गंभीरता से सुनते हैं।
भारत-रूस रिश्तों को बताया बड़ी वजह
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के संबंध कई दशकों पुराने हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच संवाद का एक मजबूत आधार मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। बार्टोशेव्स्की के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक स्तर पर सम्मानित नेता हैं और उनकी राय को कई देशों में गंभीरता से लिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में संवाद और कूटनीति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
‘आज का युग युद्ध का नहीं’ बयान फिर चर्चा में
पोलैंड के मंत्री के बयान के बाद प्रधानमंत्री मोदी का वह चर्चित संदेश एक बार फिर सुर्खियों में आ गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “आज का युग युद्ध का नहीं है”। यह संदेश रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान दुनिया भर में चर्चा का विषय बना था। भारत लगातार यह कहता रहा है कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण प्रयासों के जरिए निकाला जाना चाहिए। इसी नीति के तहत भारत ने रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संवाद बनाए रखा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने युद्ध के दौरान किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय संतुलित रुख अपनाकर अपनी अलग पहचान बनाई है।
UNSC में भारत की दावेदारी का भी मिला समर्थन
पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल है और वैश्विक मामलों में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उसे अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने ईरान से जुड़े मुद्दों पर भी भारत की नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत हमेशा तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान खोजने की बात करता है। फिलहाल उनके इस बयान के बाद भारत की विदेश नीति और प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक भूमिका को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
