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‘नरक में कदम रखोगे तो लौट नहीं पाओगे’, ईरान पर हमले की तैयारी में अमेरिका, तेहरान की ट्रंप को सीधी चेतावनी

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। तेहरान टाइम्स की चेतावनी, अमेरिकी सेना की संभावित तैनाती और हूती विद्रोहियों की धमकी से मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध के आसार बढ़ गए हैं।

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मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। ईरान के अंग्रेजी अखबार ‘तेहरान टाइम्स’ ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अमेरिकी सेना ने ईरानी जमीन पर कदम रखा, तो वह उनके लिए “कब्रगाह” साबित होगी। अखबार ने अपने फ्रंट पेज पर अमेरिकी सैनिकों की तस्वीर के साथ “नरक में आपका स्वागत है” जैसा कड़ा संदेश प्रकाशित किया है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है और दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव को और गंभीर बना दिया है।

अमेरिकी सेना की तैनाती पर मंथन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका मिडिल ईस्ट में करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती पर विचार कर रहा है। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन सभी सैन्य विकल्पों को खुला रखना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान पर दबाव बढ़ाने और संभावित जमीनी अभियान की तैयारी का हिस्सा हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह क्षेत्रीय तनाव को बड़े युद्ध में बदल सकता है।

इजरायल के साथ जारी संघर्ष ने बढ़ाई चिंता

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ पिछले कुछ हफ्तों में किए गए हमलों के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। फरवरी के अंत से शुरू हुआ यह संघर्ष लगातार बढ़ रहा है और मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में अस्थिरता फैल रही है। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स बताती हैं कि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती से अमेरिका को ज्यादा सैन्य विकल्प मिलेंगे। पहले से मौजूद हजारों सैनिकों के साथ यह नई तैनाती स्थिति को और संवेदनशील बना सकती है।

हूती विद्रोहियों के जरिए नया मोर्चा खोलने की धमकी

ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर उस पर जमीनी हमला हुआ तो वह अपने सहयोगियों को सक्रिय कर सकता है। खासतौर पर यमन के हूती विद्रोहियों को लाल सागर में हमले तेज करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य जैसे अहम रास्तों को बंद करने की धमकी ने वैश्विक चिंताओं को और बढ़ा दिया है। ऐसे में मिडिल ईस्ट का यह तनाव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।

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