ईरान युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच अब सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, बल्कि इंटरनेट कनेक्टिविटी भी जोखिम में है। युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर जैसे रणनीतिक स्थानों से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट केबल्स को नुकसान पहुँचने की चेतावनी सामने आई है। इन केबल्स से दुनिया भर में लगभग 95 प्रतिशत डेटा ट्रैफिक गुजरता है, जिससे अगर कोई बाधा आती है तो भारत समेत कई देशों की ऑनलाइन कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।
भारत की तैयारी और सरकारी कदम
भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दूरसंचार विभाग (DoT) के माध्यम से टेलीकॉम ऑपरेटर्स और सबसी केबल कंपनियों से आपातकालीन तैयारी करने को कहा है। अधिकारियों ने कंपनियों से बैकअप प्लान तैयार करने और संभावित खतरों का आकलन करने को कहा है। कंपनियों ने भी सरकार से अनुरोध किया है कि ईरान के साथ बातचीत कर केबल्स की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इससे न केवल इंटरनेट स्पीड प्रभावित हो सकती है, बल्कि नेटवर्क पर लोड भी बढ़ सकता है।
समंदर में बिछी केबल्स और भारत की स्थिति
भारत में 14 लैंडिंग स्टेशनों पर 17 समुंद्री केबल्स हैं, जो चेन्नई, मुंबई, कोच्चि और तूतीकोरिन जैसे स्थानों पर स्थित हैं। अगर होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर के Bab-el-Mandeb पॉइंट पर इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत को दूसरे रूट्स से ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ेगा। हालांकि यह विकल्प मौजूद है, लेकिन इससे इंटरनेट स्पीड में कमी और नेटवर्क पर अतिरिक्त लोड का खतरा रहेगा।
खतरनाक चोकिंग पॉइंट और वैश्विक प्रभाव
इस समय इंटरनेट केबल्स के लिए सबसे बड़ा खतरा दो प्रमुख चोकिंग पॉइंट्स पर है – होर्मुज स्ट्रेट और Bab-el-Mandeb लाल सागर। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण है, जबकि लाल सागर में ईरान समर्थित हूती विद्रोही ब्लॉक की धमकी दे रहे हैं। युद्ध की इस स्थिति के चलते न केवल भारत बल्कि यूरोपीय और मध्य पूर्व के कई देशों की कनेक्टिविटी भी प्रभावित होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केबल्स को नुकसान पहुंचता है तो इंटरनेट पर वैश्विक स्तर पर देरी और व्यवधान की स्थिति पैदा हो सकती है।
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