धार की भोजशाला को लेकर आए अदालत के फैसले के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच कवि और वक्ता Kumar Vishwas ने AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें भारतीय सांस्कृतिक इतिहास और अपने कुलवंश का अध्ययन करना चाहिए। कुमार विश्वास ने कहा कि भोजशाला केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और ज्ञान परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उन्हें कई बार धार जाकर उस स्थान पर माथा टेकने का अवसर मिला और हमेशा यह इच्छा रही कि वहां देवी वाग्देवी पूर्ण वैभव के साथ विराजमान हों। अदालत के फैसले के बाद उन्होंने इसे “भारतीय अस्मिता की जीत” बताया और कहा कि इससे करोड़ों लोगों की भावनाओं को सम्मान मिला है। कुमार विश्वास ने यह भी कहा कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति और ज्ञान परंपरा में बसती है और ऐसे फैसले समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।
‘मतांतरण से बदल सकता है धर्म, लेकिन नहीं बदलता इतिहास’
कुमार विश्वास ने अपने बयान में कहा कि कुछ पीढ़ियों पहले मतांतरण हो जाने से किसी व्यक्ति की सांस्कृतिक जड़ें समाप्त नहीं हो जातीं। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि कई लोग अपने मूल इतिहास से कटकर समाज में नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं, जबकि उनका डीएनए और पूर्वज इसी भारतीय परंपरा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम, भगवान कृष्ण और मां सरस्वती की परंपरा पूरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर है। उनका मानना है कि आने वाले समय में समाज के सभी वर्गों को यह समझना होगा कि भारत की पहचान उसकी साझा सभ्यता से है। कुमार विश्वास ने कहा कि अगर लोग अपने इतिहास को गहराई से पढ़ेंगे तो उनमें विरोध नहीं बल्कि जुड़ाव की भावना पैदा होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया अशांति और संघर्ष के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में भारतीय संस्कृति की “सत्यम शिवम सुंदरम” की भावना ही समाज को दिशा दे सकती है।
कुमार विश्वास ने जोड़ा सांस्कृतिक संघर्ष का संदर्भ
कवि कुमार विश्वास ने भोजशाला विवाद की तुलना अयोध्या राम मंदिर आंदोलन से भी की। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि संघर्ष लंबे समय तक चला और अंत में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद वहां मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। उसी तरह भोजशाला का फैसला भी उन लोगों के लिए भावनात्मक महत्व रखता है जो इसे मां वाग्देवी का स्थान मानते रहे हैं। उन्होंने कहा कि महाराजा भोज भारतीय साहित्य, कला और संस्कृति के महान संरक्षक थे और उनके समय में ज्ञान की परंपरा विश्वभर में प्रसिद्ध थी। कुमार विश्वास ने कहा कि भोजशाला केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रतीक रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में काशी और मथुरा जैसे अन्य विवादित धार्मिक मुद्दों पर भी समाज में संवाद और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए समाधान निकल सकता है। साथ ही उन्होंने विपक्ष की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार की कमियों को उठाना लोकतंत्र में विपक्ष का अधिकार है, लेकिन देशहित से जुड़े मुद्दों पर सभी को एकजुट होकर सोचने की जरूरत है।
PM मोदी की अपील का समर्थन
कुमार विश्वास ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की उस अपील का भी समर्थन किया जिसमें लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए नागरिकों को उन चीजों का कम इस्तेमाल करना चाहिए जिन पर विदेशी मुद्रा खर्च होती है। उनका मानना है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि आम लोगों की भागीदारी से भी मजबूत होती है। गौरतलब है कि भोजशाला मामले में हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए परिसर को मंदिर स्वरूप मानने की बात कही है। फैसले के बाद वहां पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई है और नमाज पर रोक लगाई गई है। इस निर्णय के बाद देशभर में बहस तेज हो गई है और राजनीतिक दलों से लेकर सामाजिक संगठनों तक अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में कुमार विश्वास का बयान भी चर्चा का केंद्र बन गया है।
