जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में पुलिस और सेना के बीच हुए विवाद ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। जानकारी के अनुसार, घटना की शुरुआत एक वाहन को लेकर हुई, जिसे कथित यातायात नियमों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने रोककर अपने कब्जे में ले लिया था। बताया जा रहा है कि यह वाहन सेना से जुड़े एक अधिकारी का निजी वाहन था। इसके बाद हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए और मामला स्थानीय पुलिस थाने तक पहुंच गया। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि वाहन जब्त किए जाने के बाद कुछ सैन्य कर्मियों और पुलिस के बीच बहस हुई, जिसने बाद में बड़े विवाद का रूप ले लिया।
पुलिस का आरोप- थाने में घुसकर की गई मारपीट
पुलिस की ओर से दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बड़ी संख्या में सैन्य कर्मी थाने परिसर में पहुंचे और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की। शिकायत के अनुसार, कुछ जवान मुख्य प्रवेश द्वार और अन्य रास्तों से थाने के अंदर पहुंचे। पुलिस का कहना है कि इस दौरान कई कर्मचारियों को चोटें आईं और ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों के साथ भी धक्का-मुक्की हुई। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि कुछ जवानों के पास डंडे और अन्य सामान भी था, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर मारपीट के दौरान किया गया। घटना के बाद घायल पुलिसकर्मियों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और पूरे मामले को रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप
इस मामले में केवल मारपीट ही नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, थाने के कुछ हिस्सों और परिसर में खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचा। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ सरकारी गाड़ियों के शीशे और अन्य हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं। पुलिस ने घटना से जुड़े कई गंभीर आरोपों को शामिल करते हुए मामला दर्ज किया है। वहीं स्थानीय प्रशासन ने भी पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी है। इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि आमतौर पर सेना और पुलिस मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभालती हैं।
जांच शुरू, दोनों पक्षों की रिपोर्ट का इंतजार
घटना के सामने आने के बाद मामला संवेदनशील बन गया है। सेना की ओर से कहा गया है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दूसरी तरफ पुलिस ने संबंधित अधिकारियों और जवानों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दोनों पक्षों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि विवाद किस परिस्थिति में इतना बढ़ गया, लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी। इस घटना ने जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों के आपसी तालमेल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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