पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से ठीक पहले Supreme Court of India के फैसले ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद BJP ने तृणमूल कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है। BJP पार्टी के राज्यसभा सांसद Sudhanshu Trivedi ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाती है, लेकिन उन्हें हर बार राहत नहीं मिलती। उन्होंने इसे न्यायपालिका पर भरोसे की कमी बताया और आरोप लगाया कि विपक्ष केवल तब ही कोर्ट जाता है जब उसे अपने पक्ष में माहौल नहीं दिखता। इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है, क्योंकि चुनाव परिणाम आने से पहले ही दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो चुका है।
एग्जिट पोल के बाद बदली TMC की रणनीति?
BJP नेता ने दावा किया कि जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा, TMC का जनसमर्थन और मनोबल कमजोर होता गया। उनके मुताबिक, चुनाव इस बार अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा, जिससे तृणमूल कांग्रेस असहज हो गई। Sudhanshu Trivedi ने कहा कि एग्जिट पोल के नतीजों के बाद पार्टी का संतुलन बिगड़ गया और अब वे चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस को केंद्रीय एजेंसियों और कर्मचारियों पर भरोसा नहीं है, जबकि राज्य के कर्मचारियों पर भरोसा जताना राजनीतिक दोहरापन दिखाता है। बीजेपी के इस रुख से यह साफ है कि पार्टी चुनाव परिणामों से पहले ही खुद को मजबूत स्थिति में दिखाने की कोशिश कर रही है।
छापेमारी और ममता बनर्जी की मौजूदगी पर उठे सवाल
आईपैक से जुड़े छापेमारी के मामले का जिक्र करते हुए BJP ने Mamata Banerjee पर भी निशाना साधा। BJP नेताओं का कहना है कि छापे के दौरान मुख्यमंत्री का मौके पर पहुंचना यह दर्शाता है कि उन्हें अपने ही प्रशासनिक तंत्र पर भरोसा नहीं है। Sudhanshu Trivedi ने इसे गंभीर राजनीतिक संकेत बताते हुए कहा कि जब कोई सरकार अपने ही सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है, तो इससे जनता में भी भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस डर और दबाव की राजनीति के जरिए सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब यह रणनीति असर खोती नजर आ रही है।
नतीजों से पहले बढ़ी सियासी बेचैनी
बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान संपन्न हुआ था और अब 4 मई को परिणाम घोषित होने हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों की बयानबाजी अपने चरम पर है। बीजेपी का दावा है कि इस बार जनता बदलाव के मूड में है और Mamata Banerjee पर लोगों का भरोसा कम हुआ है। वहीं तृणमूल कांग्रेस लगातार चुनाव प्रक्रिया और एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठा रही है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने इस बहस को और गहरा कर दिया है। अब सबकी नजरें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि जनता ने किस पर भरोसा जताया है और किसकी रणनीति सफल रही है।
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