प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक बदलाव के प्रणेता सोनम वांगचुक को आखिरकार अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। पिछले कई दिनों से वह लगातार चली लंबी भूख हड़ताल और स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती थे। अस्पताल से बाहर आने के बाद वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने अपने स्वास्थ्य में सुधार होने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अब वह पहले से काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं, उनके शरीर में ताकत लौट रही है और वह सामान्य रूप से भोजन भी कर पा रहे हैं। इस खबर के सामने आने के बाद उनके समर्थकों और देश भर के शुभचिंतकों ने राहत की सांस ली है, जो लगातार उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे।
राजघाट जाकर बापू को देंगे श्रद्धांजलि
अपने वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने अपने अगले कदम का बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि वह सीधे अपने घर जाने से पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट जाएंगे। उन्होंने याद दिलाया कि जब वह स्विट्जरलैंड से दिल्ली आए थे, तब भी जंतर-मंतर पर अपना अनशन शुरू करने से पहले उन्होंने राजघाट जाकर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। अब अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह अपनी इस यात्रा के समापन पर एक बार फिर राजघाट पहुंचकर बापू का आशीर्वाद लेंगे। वांगचुक ने इस सफल आंदोलन और अपनी लंबी लड़ाई का श्रेय देश भर से उन्हें मिले समर्थन को दिया है। उन्होंने कहा कि उनके समर्थकों ने हर कदम पर उनकी आवाज में अपनी आवाज मिलाई, जिसके कारण यह जन आंदोलन एक बड़ी सफलता तक पहुंच सका।
28 जून से शुरू हुआ था संघर्ष और अस्पताल का सफर
सोनम वांगचुक के इस संघर्ष की शुरुआत 28 जून को हुई थी, जब वह छात्रों के एक बड़े आंदोलन में शामिल हुए थे और लगातार 26 दिनों तक अनशन पर बैठे रहे थे। लंबी भूख हड़ताल के चलते उनकी तबीयत अचानक काफी बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें 18 जुलाई को सबसे पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, सफदरजंग अस्पताल के दौरान उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि उन्हें ऐसा महसूस कराया जा रहा है मानो उन्हें हिरासत में रखा गया हो। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और दिल्ली हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चला और अब जाकर उन्हें पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद छुट्टी मिली है।
पेपर लीक मामले और इस्तीफे के बाद थमा आंदोलन
यह पूरा आंदोलन मुख्य रूप से कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में लगभग 36 दिनों तक पूरी ताकत के साथ चला था। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य देश में बढ़ते पेपर लीक मामलों के खिलाफ विरोध जताना और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना था। आखिरकार, भारी दबाव और लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा, जिसके बाद यह आंदोलन समाप्त घोषित किया गया। वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय की कमान प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है। स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद सोनम वांगचुक का यह नया संदेश और राजघाट जाने का उनका यह निर्णय एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है, जो उनके अटल और अडिग इरादों को साफ दर्शाता है।
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