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एनकाउंटर स्पेशलिस्ट IPS अजय पाल शर्मा की बंगाल चुनाव में तैनाती, क्या चुनाव आयोग की तरफ से अलग से मिलेगी सैलरी?

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में IPS अजय पाल शर्मा की पर्यवेक्षक के रूप में तैनाती चर्चा में है। जानें क्या उन्हें अलग सैलरी मिलेगी, चुनाव आयोग के नियम और राजनीतिक विवाद की पूरी जानकारी।

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान के बीच एक बड़ा प्रशासनिक फैसला चर्चा में आ गया है। उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा (Ajay Pal Sharma) को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया है। उन्हें राज्य में कानून-व्यवस्था और मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। अजय पाल शर्मा (Ajay Pal Sharma) को एक सख्त और तेज कार्रवाई करने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है, जिनकी पहचान अनुशासन और कठोर निर्णयों के लिए रही है। उनकी तैनाती को चुनाव आयोग की उस रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है। लेकिन इसी फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है कि आखिर बंगाल जैसे राज्य में दूसरे राज्य के अधिकारी को क्यों भेजा गया।

सैलरी को लेकर उठे सवाल

अजय पाल शर्मा (Ajay Pal Sharma) की नियुक्ति के बाद सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया है कि क्या उन्हें इस विशेष चुनावी ड्यूटी के लिए अलग से सैलरी दी जाएगी। आम नियमों के अनुसार, चुनाव ड्यूटी पर तैनात किसी भी अधिकारी को उसकी मूल सैलरी उसके पैरेंट डिपार्टमेंट यानी मूल विभाग से मिलती रहती है। यानी अजय पाल शर्मा (Ajay Pal Sharma) को यूपी पुलिस से उनकी नियमित तनख्वाह मिलती रहेगी। हालांकि, चुनाव आयोग इस तरह की अतिरिक्त जिम्मेदारियों के लिए अलग से मानदेय और भत्ते भी प्रदान करता है। यह भुगतान सैलरी से अलग होता है और इसे अतिरिक्त कार्य के लिए प्रोत्साहन के रूप में दिया जाता है। इसमें भोजन भत्ता, दैनिक खर्च और विशेष ड्यूटी अलाउंस शामिल होता है, जो लगभग तय नियमों के तहत दिया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिकारी बिना किसी आर्थिक परेशानी के अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।

TA-DA और सुविधाओं का पूरा ढांचा

चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, पर्यवेक्षक और चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। इसमें यात्रा भत्ता (TA) और महंगाई भत्ता (DA) शामिल होता है, जो उनके मूल विभाग द्वारा भी स्वीकृत किया जाता है। इसके अलावा, चुनाव आयोग उनके ठहरने, यात्रा और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था करता है। हाल ही में आयोग ने राजपत्रित अधिकारियों के मानदेय में भी संशोधन किया है, जिससे लंबे समय तक ड्यूटी करने वाले अधिकारियों को साप्ताहिक या निश्चित अवधि के आधार पर अतिरिक्त भुगतान मिलता है। वहीं, भोजन और दैनिक खर्च के लिए अलग से राशि दी जाती है, जो लगभग 500 रुपये प्रतिदिन तक हो सकती है। इस पूरी व्यवस्था का मकसद यह है कि अधिकारी पूरी तरह निष्पक्ष रहकर चुनावी प्रक्रिया पर ध्यान दे सकें और किसी भी बाहरी दबाव से मुक्त रहें।

राजनीतिक विवाद और टीएमसी का विरोध

अजय पाल शर्मा (Ajay Pal Sharma) की तैनाती को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। टीएमसी का कहना है कि उत्तर प्रदेश के एक अधिकारी को बंगाल में चुनाव पर्यवेक्षक बनाना समझ से परे है और इससे निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अक्सर दूसरे राज्यों के अनुभवी अधिकारियों को तैनात किया जाता है, ताकि स्थानीय प्रभाव से बचा जा सके। इस बीच अजय पाल शर्मा (Ajay Pal Sharma) ने अपनी जिम्मेदारी संभालते ही सख्त रुख अपनाया है और चुनावी इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। उनकी सक्रियता के चलते प्रशासनिक हलकों में हलचल और राजनीतिक दलों में सतर्कता बढ़ गई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या उनकी तैनाती से चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी होगी या यह विवाद और गहराएगा।

Read More-सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा IPS अजय पाल शर्मा पर विवाद, किसने कहा- ‘ड्यूटी से तुरंत हटाया जाए…’

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