उत्तर प्रदेश में बढ़ती भीषण गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने गो-आश्रय स्थलों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी गो-आश्रय केंद्रों में पशुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से व्यवस्थाएं सुधारने को कहा गया है, ताकि गर्मी के कारण किसी भी गोवंश को नुकसान न पहुंचे। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। इस फैसले के बाद जिलों में तेजी से व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का काम शुरू हो गया है।
कूलिंग सिस्टम और पानी की व्यवस्था अनिवार्य
सरकार के निर्देशों के अनुसार, सभी गो-आश्रय स्थलों में गर्मी से बचाव के लिए आधुनिक और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसमें वाटर मिस्टिंग सिस्टम, कूलर, पंखे और पर्याप्त छायादार जगह की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पशुओं को हर समय स्वच्छ और ठंडा पेयजल मिलता रहे। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि व्यवस्थाओं में कोई कमी न रहे। कई जिलों में फॉगिंग सिस्टम और अतिरिक्त पानी के टैंक भी लगाए जा रहे हैं, जिससे गोवंश को लू से राहत मिल सके।
चारा संकट से निपटने की तैयारी
गर्मी के साथ-साथ चारे की कमी भी एक बड़ी समस्या बन सकती है, जिसे देखते हुए सरकार ने पहले से ही योजना तैयार कर ली है। गो-आश्रय स्थलों में पर्याप्त मात्रा में हरा चारा और भूसा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा खाली पड़ी चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर वहां हाइब्रिड नेपियर घास की बुआई करने के निर्देश दिए गए हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इससे लंबे समय तक चारे की कमी नहीं होगी। साथ ही गो-आश्रय स्थलों में पेड़-पौधे लगाने का अभियान भी चलाया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक छाया मिल सके।
भूसा दान अभियान को मिल रहा समर्थन
प्रदेश में भूसा दान अभियान को भी काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। महराजगंज, जौनपुर, बलिया, वाराणसी, सहारनपुर और गोरखपुर समेत कई जिलों में लोग आगे आकर गो-आश्रय स्थलों को भूसा उपलब्ध करा रहे हैं। कुछ जिलों में दानदाताओं को विशेष प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया जा रहा है। सरकार ने अन्य जिलों से भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। कुल मिलाकर, यह पहल न सिर्फ गोवंश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में सहयोग और जागरूकता बढ़ाने का भी एक बड़ा उदाहरण बन रही है।
