गोरखपुर-पिपराइच मार्ग पर स्थित संत हुसैन नगर के पास गोड़धोइया नाला पर बना पुराना पुल अब इतिहास बनने जा रहा है। बुधवार को निर्माणाधीन गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन का निरीक्षण कर लौटते समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अचानक यहां रुके। जैसे ही उनकी नजर गोड़धोइया नाला पर बने पुराने पुल पर पड़ी, उन्होंने उसकी जर्जर हालत को गंभीरता से लिया। पुल की हालत देखकर सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि यह भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। बिना समय गंवाए उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस पुल को तोड़कर इसके स्थान पर नया और सुरक्षित पुल बनाया जाए।
मुख्यमंत्री का यह फैसला सिर्फ एक औपचारिक निर्देश नहीं था, बल्कि सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया त्वरित निर्णय था। अधिकारियों को यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि निर्माण में किसी तरह की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय लोगों के लिए यह पुल लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ था, ऐसे में मुख्यमंत्री के इस कदम को राहत भरा फैसला माना जा रहा है।
मार्च तक पूरा करने का अल्टीमेटम
पुल के निरीक्षण के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोड़धोइया नाला परियोजना की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से साफ कहा कि इस परियोजना के तहत पहले से तय सभी कार्य हर हाल में मार्च माह तक पूरे होने चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गोड़धोइया नाला परियोजना सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि गोरखपुर शहर के उत्तरी हिस्से की वर्षों पुरानी जलभराव समस्या का स्थायी समाधान है।
उन्होंने कहा कि नाला परियोजना पूरी होने के बाद बारिश के दिनों में होने वाली परेशानियों से लोगों को राहत मिलेगी और शहर की जल निकासी व्यवस्था मजबूत होगी। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि परियोजना के कई अहम चरण पूरे हो चुके हैं और शेष कार्य तेजी से चल रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने काम की गति बनाए रखने और गुणवत्ता से कोई समझौता न करने के निर्देश दिए। उनके सख्त रुख से साफ संकेत मिला कि सरकार इस परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए पूरी तरह गंभीर है।
गोड़धोइया नाला की बदली जा रही तस्वीर
गौरतलब है कि गोड़धोइया नाला कभी गोरखपुर में उपेक्षा और गंदगी की पहचान बन चुका था। दशकों तक अतिक्रमण और साफ-सफाई के अभाव में यह नाला लगभग विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया था। स्थानीय लोगों के लिए यह नाला समस्या का कारण बन गया था, खासकर बरसात के मौसम में। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद इस नाले के कायाकल्प का निर्णय लिया और इसके लिए एक व्यापक परियोजना तैयार कराई गई।
इस परियोजना के तहत पक्का नाला निर्माण, डायवर्जन सिस्टम, इंटरसेप्शन और ट्रीटमेंट प्लांट जैसे आधुनिक उपाय शामिल किए गए हैं। करीब 474.42 करोड़ रुपये की लागत से चल रही इस योजना का उद्देश्य न सिर्फ जल निकासी को बेहतर बनाना है, बल्कि शहर के पर्यावरण और स्वच्छता स्तर को भी ऊंचा उठाना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह याद दिलाया कि यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों के लिए है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। गोड़धोइया नाला अब गोरखपुर के विकास की नई कहानी लिखने की ओर बढ़ रहा है।
विरासत गलियारा भी रफ्तार पकड़े, जनवरी तक हटें सभी अवरोध
गोड़धोइया नाला और पुल निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रेती चौक पहुंचे, जहां उन्होंने धर्मशाला से पाण्डेयहाता तक बन रहे विरासत गलियारा परियोजना का भी जायजा लिया। यह परियोजना गोरखपुर शहर की यातायात व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान को नया रूप देने के लिए अहम मानी जा रही है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की प्रगति देखी और कार्यदायी संस्था को साफ निर्देश दिए कि काम की रफ्तार और तेज की जाए।
उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण में जो भी अवरोध आ रहे हैं, उन्हें हर हाल में 15 जनवरी से पहले हटा लिया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विरासत गलियारा परियोजना तय समय सीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए। करीब 3.5 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर 555.56 करोड़ रुपये की लागत आ रही है और इसे अप्रैल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री के निरीक्षण और सख्त निर्देशों से यह साफ हो गया है कि गोरखपुर में विकास कार्यों को लेकर सरकार कोई ढिलाई नहीं बरतने वाली।
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