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छात्रवृत्ति में बड़ी चूक! यूपी में सामान्य श्रेणी के छात्रों को तय सीमा से मिले ज्यादा पैसे, अब कैसे होगी रिकवरी?

UP Scholarship वितरण में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। सामान्य श्रेणी के छात्रों को निर्धारित सीमा से ज्यादा छात्रवृत्ति भेज दी गई। विभाग में हड़कंप मचा है, जानिए पूरी सच्चाई

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उत्तर प्रदेश में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। समाज कल्याण विभाग द्वारा सामान्य श्रेणी के छात्रों के बैंक खातों में तय सीमा से कहीं अधिक रकम भेज दी गई है। नियमों के अनुसार सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के आधार पर एक तय अधिकतम राशि ही दी जानी थी, लेकिन विभागीय चूक के चलते कई छात्रों को उनकी पूरी फीस के बराबर पैसा ट्रांसफर कर दिया गया। इस गड़बड़ी के सामने आते ही विभाग में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला हाल ही में 25 जनवरी को किए गए छात्रवृत्ति वितरण से जुड़ा है, जिसमें प्रदेश भर के लाखों छात्रों के खाते में पैसा भेजा गया था। इसी दौरान करीब दो हजार से अधिक सामान्य श्रेणी के छात्रों को तय नियमों से ज्यादा रकम मिल गई। जैसे ही इस बात की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंची, तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी गई।

किस कोर्स में कितनी छात्रवृत्ति तय थी, कहां हुई चूक

नियमों के अनुसार, सामान्य श्रेणी के छात्रों को चार अलग-अलग श्रेणियों में शुल्क प्रतिपूर्ति दी जाती है। कक्षा 11, 12 और आईटीआई जैसे पाठ्यक्रमों के लिए अधिकतम 10 हजार रुपये, डीएलएड, बीए और बीएससी जैसे कोर्स के लिए अधिकतम 20 हजार रुपये, एमए और बीएड जैसे पाठ्यक्रमों में अधिकतम 30 हजार रुपये और बीटेक, एमबीबीएस जैसे प्रोफेशनल कोर्स के लिए सामान्य श्रेणी के छात्रों को अधिकतम 50 हजार रुपये तक की ही प्रतिपूर्ति की जा सकती है।
लेकिन इस बार गलती यह हुई कि कई छात्रों को इन सीमाओं के बजाय उनकी कॉलेज फीस की पूरी रकम दे दी गई। सबसे ज्यादा प्रभावित छात्र बीएड कोर्स से जुड़े बताए जा रहे हैं। ऐसे छात्रों की संख्या करीब दो हजार से ज्यादा बताई जा रही है, जिनके खातों में 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक अतिरिक्त रकम चली गई। यह रकम सीधे सरकारी खजाने से गई, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

कैपिंग सॉफ्टवेयर में लापरवाही बनी बड़ी वजह

जांच में सामने आया है कि यह गड़बड़ी किसी तकनीकी खराबी से नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही के कारण हुई। दरअसल, छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि तय करते समय जिस कैपिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, उसमें यह तय नहीं किया गया कि किस श्रेणी के छात्र को अधिकतम कितनी रकम दी जानी है।
कैपिंग सही तरीके से न होने के कारण सिस्टम ने छात्रों की वास्तविक फीस को ही आधार बना लिया और पूरी फीस उनके खातों में ट्रांसफर कर दी। अब समाज कल्याण विभाग इस बात पर मंथन कर रहा है कि इस अतिरिक्त भेजी गई रकम को कैसे समायोजित किया जाए। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि छात्रों से सीधी रिकवरी करना व्यवहारिक और मानवीय रूप से सही नहीं माना जा रहा।

भविष्य की छात्रवृत्ति से होगी समायोजन, कार्रवाई के संकेत

इस पूरे मामले पर समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह मानवीय चूक का मामला है और इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि छात्रों से पैसा वापस लेने के बजाय, भविष्य में मिलने वाली छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि से इस अतिरिक्त रकम को समायोजित किया जाएगा।
सरकार के इस रुख से छात्रों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन साथ ही विभागीय सिस्टम पर सवाल और गहरे हो गए हैं। शिक्षा से जुड़ी योजनाओं में इस तरह की लापरवाही न सिर्फ सरकारी खजाने पर असर डालती है, बल्कि छात्रों के बीच भ्रम और असमंजस भी पैदा करती है। फिलहाल विभाग मामले की पूरी रिपोर्ट तैयार कर रहा है और आने वाले समय में छात्रवृत्ति प्रणाली को और सख्त व पारदर्शी बनाने की बात कही जा रही है।

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