Budget 2026: देश के एग्रीकल्चर और फूड सेक्टर को नई दिशा देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वां केंद्रीय बजट पेश करते हुए कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए हैं। इस बजट का सबसे बड़ा फोकस किसानों की आय बढ़ाने, खेती को आधुनिक बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर रखा गया है। सरकार ने साफ किया है कि अब खेती केवल परंपरागत तरीकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक मैनेजमेंट को जोड़ा जाएगा। बजट में किसानों को AI आधारित टूल्स की सुविधा देने की बात कही गई है, जिससे फसल की पैदावार, मिट्टी की सेहत, मौसम की जानकारी और बाजार के दामों का आकलन पहले से बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से खेती की लागत कम होगी और किसानों को सही समय पर सही फैसले लेने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही ग्रामीण और शहरी इलाकों के आसपास एग्रीकल्चर आधारित रोजगार को बढ़ावा देने की भी रणनीति बनाई गई है, ताकि खेती सिर्फ आजीविका नहीं बल्कि मुनाफे का साधन बन सके।
बागबानी, अखरोट-बादाम और कोकोनट पर बड़ा दांव
बजट 2026 में बागबानी सेक्टर को नई ऊर्जा देने के लिए एक समर्पित कार्यक्रम की घोषणा की गई है। इसके तहत पुराने और कम उपज वाले फल उद्यानों का कायाकल्प किया जाएगा, ताकि उनकी उत्पादकता बढ़ाई जा सके। खास बात यह है कि अखरोट, बादाम और खुमानी जैसी फसलों की उच्च घनत्व खेती को बढ़ावा देने का फैसला लिया गया है, जिससे पहाड़ी और उपयुक्त जलवायु वाले क्षेत्रों में किसानों की आय में इजाफा हो सके। इसके अलावा कोकोनट यानी नारियल उत्पादन को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कोकोनट प्रोत्साहन योजना लागू की जाएगी। इस योजना से करीब 1 करोड़ किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जबकि इससे जुड़े कामों के माध्यम से लगभग 3 करोड़ लोगों को रोजगार और आय के अवसर मिल सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि नारियल आधारित उत्पादों की वैल्यू चेन मजबूत हो और किसान केवल कच्चा माल बेचने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से भी फायदा उठाएं।
काजू-कोको को ग्लोबल पहचान और पशुपालन को नई ताकत
फूड सेक्टर में भारत की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने के लिए बजट में बड़ा लक्ष्य तय किया गया है। सरकार ने घोषणा की है कि 2030 तक भारतीय काजू और भारतीय कोको को प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए गुणवत्ता सुधार, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों और उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जा सके। वहीं पशुपालन सेक्टर को मजबूत करने के लिए भी अहम फैसले लिए गए हैं। पशु चिकित्सा और अर्ध पशु चिकित्सा महाविद्यालयों, अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और निजी क्षेत्र में प्रजनन सुविधाओं के लिए सब्सिडी देने का ऐलान किया गया है। इसका सीधा फायदा पशुपालकों को मिलेगा, क्योंकि बेहतर इलाज और सेवाओं से पशुओं की सेहत सुधरेगी और उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आसपास पशुपालन आधारित उद्यमिता को सहायता दी जाएगी, जिससे डेयरी, पोल्ट्री और अन्य पशुपालन गतिविधियों में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
मत्स्य पालन से लेकर रोजगार तक, समग्र विकास की सोच
बजट 2026 में मत्स्य पालन को भी खास तवज्जो दी गई है। सरकार ने 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास का ऐलान किया है, ताकि मछली उत्पादन को बढ़ाया जा सके। तटीय इलाकों में मछली पालन की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा, जिससे मछुआरों को बेहतर कीमत और बाजार मिल सके। इसके साथ ही फिश एफपीओ यानी फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन को स्टार्टअप्स और महिला समूहों से जोड़ा जाएगा, ताकि इस सेक्टर में नवाचार और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिले। कुल मिलाकर यह बजट खेती, पशुपालन, बागबानी और मत्स्य पालन को एक साथ जोड़कर देखने की कोशिश करता है। सरकार की मंशा साफ है कि एग्रीकल्चर और फूड सेक्टर को सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे रोजगार, निर्यात और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनाया जाए। आने वाले वर्षों में इन घोषणाओं का असर जमीन पर कितना दिखता है, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन इतना तय है कि बजट 2026 ने खेती और किसानों के भविष्य को लेकर बड़ी उम्मीदें जगा दी हैं।
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