पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण का मतदान शुरू होते ही सूबे का सियासी तापमान सातवें आसमान पर पहुंच गया है। 142 सीटों पर हो रही वोटिंग के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। भवानीपुर में अपना वोट डालने के बाद ‘दीदी’ का दर्द छलक उठा। उन्होंने अपने 42 साल के लंबे चुनावी करियर को याद करते हुए इस बार के चुनाव पर गंभीर सवाल उठाए हैं। Mamata Banerjee ने साफ़ कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में इतने संघर्षों के बावजूद ऐसा माहौल कभी नहीं देखा, जैसा इस बार बनाया जा रहा है।
केंद्रीय बलों पर बरसीं Mamata Banerjee
भवानीपुर के चक्रबेरिया मतदान केंद्र पर वोट डालने के बाद CM ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) मीडिया से बात करते हुए काफी आक्रामक नजर आईं। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा तैनात सुरक्षाबलों (CRPF) पर सीधा हमला बोला। ममता ने आरोप लगाया कि केंद्रीय बल मतदाताओं, खासकर महिलाओं और बच्चों को डरा-धमका रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं 1984 से चुनाव लड़ रही हूं, लेकिन इस बार जो अत्याचार हो रहा है, वह लोकतंत्र का अपमान है। केंद्रीय बलों को बॉर्डर की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन वे यहां एक विशेष राजनीतिक दल की रक्षा कर रहे हैं।” ममता ने दावा किया कि कई बूथों से उनके एजेंटों को जबरन बाहर निकाला गया है, जो निष्पक्ष चुनाव के दावों की धज्जियां उड़ाता है।
शुभेंदु का ‘हिंदू कार्ड’ और घुसपैठियों पर प्रहार
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के आरोपों के बीच बीजेपी के कद्दावर नेता और उनके पुराने सहयोगी रहे शुभेंदु अधिकारी ने भी मोर्चा खोल दिया। शुभेंदु ने ममता के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी हार की हताशा बताया। शुभेंदु अधिकारी ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा, “पूरे बंगाल का हिंदू समाज अब जाग चुका है।” उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के पक्ष में हंगामा करने वाले लोग ‘घुसपैठिए’ हैं, जिन्हें रोकने के लिए सुरक्षाबलों का सख्त होना जरूरी है। शुभेंदु ने चुनाव आयोग के उस फैसले का भी स्वागत किया जिसमें भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बलों को पूरी छूट दी गई है।
जब भवानीपुर में टकराए ‘दो शेर
बुधवार को भवानीपुर सीट पर एक ऐसा दुर्लभ नजारा देखने को मिला जिसने वहां मौजूद लोगों की धड़कनें तेज कर दीं। CM ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी एक ही समय पर कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 73 स्थित मतदान केंद्र पर पहुंच गए। हालांकि दोनों नेताओं के बीच एक शब्द की भी बातचीत नहीं हुई और न ही नजरें मिलीं, लेकिन उनके बीच का तनाव हवा में साफ महसूस किया जा सकता था। भवानीपुर इस बार के चुनाव में सबसे ‘हॉट सीट’ मानी जा रही है, और इन दोनों नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि यहां की जंग अब प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है।
रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग
तमाम आरोपों और हिंसा की छिटपुट खबरों के बीच बंगाल की जनता ने लोकतंत्र के उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शाम तक लगभग 78.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो किसी बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है। जहां एक तरफ ममता बनर्जी ‘विक्ट्री साइन’ दिखाकर अपनी जीत का भरोसा दिला रही हैं, वहीं बीजेपी का खेमा सत्ता परिवर्तन की उम्मीद लगाए बैठा है। 42 साल तक चुनावी अखाड़े की खिलाड़ी रहीं ममता बनर्जी के इस ताजा बयान ने राज्य के मतदाताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या इस बार 1984 से शुरू हुआ यह सफर किसी नए मोड़ पर पहुंचेगा? इसका जवाब 4 मई को ही मिलेगा।
