इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में सबसे मार्मिक कहानी उस छह महीने के मासूम की है, जिसकी मौत ने एक पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। बच्चे के पिता सुनील साहू बताते हैं कि उनके घर में यह बेटा पूरे 10 साल बाद पैदा हुआ था। पहले से एक बेटी है और बेटे के जन्म को परिवार ने ईश्वर का वरदान माना था। लेकिन किसी को क्या पता था कि वही पानी, जिसे जिंदगी का आधार कहा जाता है, उनके बेटे की जान ले लेगा। इलाके में लगातार उल्टी-दस्त और बुखार के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं कई परिवार अपनों को खो चुके हैं। मासूम की मौत के बाद मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है और लोग सिस्टम की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।
26 दिसंबर से बिगड़ती तबीयत, 29 को थम गई सांसें: पिता की आंखों से छलका दर्द
सुनील साहू ने मीडिया से बातचीत में जो बताया, वह किसी भी माता-पिता का कलेजा चीर देने वाला है। उन्होंने कहा कि 26 दिसंबर को बच्चे को अचानक दस्त शुरू हो गए थे। परिवार उसे पास के डॉक्टर के पास ले गया, जहां दवाइयां दी गईं। दो दिन तक बच्चा कुछ बेहतर लगा, लेकिन 29 दिसंबर की रात अचानक तेज बुखार हुआ, उल्टी हुई और देखते ही देखते उसकी हालत बिगड़ गई। अस्पताल ले जाने का मौका भी नहीं मिला और घर पर ही उसकी मौत हो गई। सुनील साहू कहते हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि पीने का पानी इतना खतरनाक हो सकता है। इलाके के लोग बताते हैं कि नलों से आ रहा पानी बदबूदार था, फिर भी मजबूरी में वही पानी इस्तेमाल किया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर समय रहते पानी की जांच होती, तो क्या यह मासूम आज जिंदा होता?
दूषित पानी से कई मौतें, प्रशासन पर बढ़ा दबाव
भागीरथपुरा इलाके में यह कोई अकेली घटना नहीं है। दूषित पानी पीने से कई लोगों की तबीयत बिगड़ी और कुछ की मौत की पुष्टि भी हुई है। अस्पतालों में उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी प्रशासन को गंदे पानी की शिकायत की थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पानी की सप्लाई लाइन में गंदगी मिलने और सीवेज मिक्स होने की आशंका जताई जा रही है। इस घटना के बाद नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर नियमित जल परीक्षण क्यों नहीं हुआ और चेतावनी के बावजूद सप्लाई बंद क्यों नहीं की गई। हादसे ने प्रशासनिक लापरवाही की एक गंभीर तस्वीर सामने रख दी है।
सीएम मोहन यादव एक्शन में: मुआवजा, फ्री इलाज और जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद इंदौर पहुंचे और अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से इलाज की स्थिति की जानकारी ली और अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि किसी भी मरीज के इलाज में कोई कमी न रहे। सीएम ने घोषणा की कि दूषित पानी से जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिजनों को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि सभी पीड़ितों का इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए पूरे मामले की गहन जांच कराई जाएगी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हालांकि, बेटे को खो चुके परिवारों का कहना है कि मुआवजा उनके जख्म नहीं भर सकता, उन्हें सिर्फ यह चाहिए कि किसी और के घर की किलकारी इस तरह न बुझे।
