उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऐसा विवाद हुआ, जिसने पार्टी के नेताओं को ही आमने-सामने ला दिया। मामूली बात से शुरू हुआ झगड़ा देखते ही देखते गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंच गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हंगामे की चर्चा हो रही है। जानकारी के मुताबिक, शनिवार को गोरखपुर प्रेस क्लब में ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इसी कार्यक्रम में कुर्सी पर बैठने और थोड़ा किनारे खिसकने को लेकर विवाद शुरू हुआ। मामला इतना बढ़ा कि बीच-बचाव के लिए पुलिसकर्मियों को भी आना पड़ा। इस घटना के बाद स्थानीय सपा नेताओं के बीच विवाद चर्चा का विषय बन गया है।
थोड़ी जगह मांगने पर शुरू हुई कहासुनी, फिर हाथापाई
बताया गया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने के करीब 10 मिनट बाद ग्रामीण विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे सपा नेता अंशुमान सिंह अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। उस समय सामने की तरफ कई पदाधिकारी पहले से बैठे थे और ज्यादातर कुर्सियां भरी हुई थीं। अंशुमान सिंह ने बैठने के लिए जगह तलाश की और एक कुर्सी मंगवाई। इसी दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से थोड़ा किनारे खिसकने को कहा गया। इसी बात पर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते कहासुनी ने उग्र रूप ले लिया और हाथापाई होने लगी। घटना के दौरान मौजूद लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन करीब 10 से 15 मिनट तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
नगीना साहनी ने लगाए मारपीट और पिस्तौल दिखाने के आरोप
इस विवाद में नगीना साहनी ने आरोप लगाया कि अंशुमान सिंह और उनके बेटे कमलेश सिंह ने उनके साथ मारपीट की। उनका यह भी आरोप है कि उन्हें पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई। बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान कमलेश सिंह ने नगीना साहनी की ओर हाथ उठाया। पूरी घटना प्रेस क्लब में लगे कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसके बाद वीडियो चर्चा में आया। नगीना साहनी ने मामले में अंशुमान सिंह के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है। हालांकि, पिस्तौल दिखाने और धमकी देने से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इस घटना ने राजनीतिक कार्यक्रमों में नेताओं के व्यवहार को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
सपा ने अंशुमान सिंह को पार्टी से निकाला
मामला सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी ने कार्रवाई करते हुए अंशुमान सिंह को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई इस घटना के बाद पार्टी के भीतर भी कार्रवाई को अहम माना जा रहा है। विवाद के दौरान सपा नेताओं के साथ पुलिसकर्मियों को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था। अब इस मामले में दर्ज एफआईआर और लगाए गए आरोपों की जांच आगे की कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक कुर्सी के लिए जगह बनाने से हुई बताई जा रही है, लेकिन बात इतनी बढ़ गई कि मामला मारपीट, धमकी के आरोप और पार्टी से निष्कासन तक पहुंच गया।
Read More-भरी महफिल में अमिताभ ने जया बच्चन पर कुछ ऐसे लुटाया प्यार, देख कर सभी गए हैरान
