उत्तर प्रदेश की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब सबकी नजर सोमवार 18 मई को होने वाली योगी कैबिनेट की पहली बैठक पर टिकी हुई है। मुख्यमंत्री आवास पर सुबह 9:45 बजे से शुरू होने वाली इस अहम बैठक को कई मायनों में खास माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक के दौरान नए मंत्रियों को विभागों का आवंटन किया जा सकता है। इसके साथ ही सरकार कई बड़े प्रशासनिक और विकास से जुड़े फैसलों पर भी चर्चा कर सकती है। कैबिनेट विस्तार के बाद यह पहली औपचारिक बैठक होगी, इसलिए राजनीतिक गलियारों में इसकी काफी चर्चा हो रही है।
योगी सरकार में शामिल हुए छह नए चेहरे
हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छह नए नेताओं को अपनी टीम में शामिल किया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में इन नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी। नई टीम में भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडेय, सुरेंद्र दिलेर, कैलाश राजूपत, कृष्णा पासवान और हंसराज विश्वकर्मा को जगह मिली है। इसके अलावा सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल को प्रमोशन देकर उनकी जिम्मेदारियां बढ़ाई गई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि किन मंत्रियों को कौन सा विभाग मिलेगा और सरकार किस तरह से नई जिम्मेदारियां तय करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभागों का बंटवारा आने वाले चुनावों की रणनीति को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
2027 चुनाव से पहले बीजेपी की बड़ी रणनीति
योगी सरकार के इस विस्तार को सिर्फ सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। बीजेपी ने इस विस्तार के जरिए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है। पार्टी अलग-अलग समाज और क्षेत्रों से नेताओं को शामिल कर अपने वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। खास तौर पर पिछड़ा, दलित और गैर-यादव ओबीसी वर्ग को साधने के संकेत इस विस्तार में साफ दिखाई दे रहे हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाकर चुनावी जमीन मजबूत करना चाहती है।
बैठक में विकास योजनाओं पर भी हो सकती है चर्चा
सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट बैठक में सिर्फ विभागों के बंटवारे पर ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि कई विकास योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों पर भी मुहर लग सकती है। सरकार आगामी महीनों में जनता से जुड़े मुद्दों पर तेजी से काम करने की तैयारी में है। यही वजह है कि नए मंत्रियों को जल्द जिम्मेदारी देकर काम शुरू कराने की योजना बनाई जा रही है। बैठक के बाद कई बड़े फैसलों का ऐलान भी हो सकता है, जिससे सरकार का अगला रोडमैप साफ होगा। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बैठक आने वाले समय में यूपी की राजनीति की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।
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