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मां काली को जीभ काटकर चढ़ाई भेंट! हरदोई में सामने आई दिल दहला देने वाली घटना

हरदोई के काली मंदिर में महिला ने जीभ काटकर चढ़ाई, पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं। आस्था या अंधविश्वास? जानें पूरा मामला।

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Hardoi News: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यह आस्था है या अंधविश्वास। देहात कोतवाली क्षेत्र के धियर मोहलिया स्थित एक काली मंदिर में पूजा के दौरान एक महिला ने अपनी ही जीभ काटकर देवी के चरणों में चढ़ा दी। घटना इतनी अचानक हुई कि मंदिर में मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए और देखते ही देखते वहां अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने महिला को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया। इस घटना ने न सिर्फ लोगों को झकझोर दिया, बल्कि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

पुलिस के अनुसार, महिला की पहचान ऊषा के रूप में हुई है, जो बावन चुंगी इलाके की रहने वाली बताई जा रही है। पूजा के दौरान उसने अचानक यह खौफनाक कदम उठा लिया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे तुरंत संभाला और पुलिस के सहयोग से मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस अधिकारी हरिनाथ सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। फिलहाल पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि महिला ने यह कदम किसी मानसिक दबाव, धार्मिक मान्यता या किसी अन्य कारण से उठाया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि मंदिर में पहले से पुलिस सुरक्षा मौजूद थी, इसके बावजूद इतनी बड़ी घटना हो जाना कई सवाल खड़े करता है।

पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले भी यहां कई बार आत्म-क्षति से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। साल 2018 में भी एक युवक ने कथित तौर पर देवी के आदेश का हवाला देते हुए खुद पर धारदार हथियार से हमला कर लिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके अलावा, जीभ काटकर चढ़ाने की घटनाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। इन घटनाओं ने प्रशासन और समाज दोनों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है कि आखिर ऐसी खतरनाक मान्यताएं कैसे पनप रही हैं और इन्हें कैसे रोका जाए।

उठ रहे हैं बड़े सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या इस तरह के कृत्य को आस्था का नाम दिया जा सकता है या यह अंधविश्वास का खतरनाक रूप है। इस तरह की घटनाएं न सिर्फ व्यक्ति के लिए घातक होती हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी फैलाती हैं। वहीं, प्रशासन के लिए यह जरूरी हो जाता है कि ऐसे स्थानों पर निगरानी और जागरूकता दोनों को मजबूत किया जाए। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घटना के पीछे असली वजह क्या थी। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

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