उत्तर प्रदेश (UP) में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज होती जा रही है। NDA में शामिल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) ने बीजेपी के सामने सीट बंटवारे को लेकर बड़ा दावा पेश किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष **रामदास आठवले** ने साफ शब्दों में कहा है कि उनकी पार्टी को राज्य में कम से कम 25 सीटें दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो RPI 403 सीटों पर अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला ले सकती है। इस बयान ने चुनाव से पहले गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
केंद्र में गठबंधन मजबूत, लेकिन राज्य में बढ़ी तल्खी
आठवले ने यह जरूर दोहराया कि केंद्र में उनका गठबंधन बीजेपी के साथ मजबूत है, लेकिन उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण अलग हैं। उनका कहना है कि दलित बहुल सीटों पर RPI की पकड़ लगातार मजबूत हुई है और पार्टी अब इन क्षेत्रों में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाना चाहती है। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अब पहले जैसी प्रभावशाली नहीं रही और दलित वोट बैंक में नई राजनीतिक ताकत के रूप में RPI उभर रही है। ऐसे में पार्टी आगामी चुनाव में ज्यादा सीटों की दावेदारी कर रही है।
सपा-कांग्रेस पर भी बोला हमला
इस मुद्दे के साथ-साथ आठवले ने विपक्षी दलों पर भी हमला बोला। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर महिला आरक्षण संशोधन बिल का विरोध करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक ये दोनों दल महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने में बाधा बन रहे हैं। आठवले ने कहा कि जो पार्टियां महिला सशक्तिकरण की बात करती हैं, उन्हें संसद में भी उसका समर्थन करना चाहिए। इस बयान से साफ है कि RPI केवल सीट बंटवारे तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह अपने राजनीतिक एजेंडे को भी मजबूती से सामने रख रही है।
दलित समाज भवन की मांग से साधा सामाजिक समीकरण
राजनीतिक दबाव के साथ-साथ RPI ने सामाजिक मुद्दों को भी उठाया है। आठवले ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री **योगी आदित्यनाथ** से मांग की है कि दलित बहुल गांवों में समाज भवन बनाए जाएं। उनका कहना है कि इन भवनों का संचालन खुद दलित समाज के हाथों में दिया जाना चाहिए, ताकि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। बताया जा रहा है कि RPI के प्रदेश अध्यक्ष पवन गुप्ता के साथ आठवले जल्द ही मुख्यमंत्री और बीजेपी प्रदेश नेतृत्व से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपेंगे। इससे साफ है कि पार्टी चुनावी रणनीति के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों को भी मजबूती से जोड़ रही है।
Read more-शोरूम में बहस कैसे बनी हिंसा? Lenskart विवाद ने लिया नया मोड़, ग्राहक और कर्मचारी के बीच हाथापाई
