अमेठी में सरकारी धन के कथित 4 करोड़ रुपये के गबन मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की जांच अपने हाथ में लेते हुए बुधवार सुबह एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई अमेठी, लखनऊ, अयोध्या, प्रतापगढ़ और कुशीनगर समेत पांच जिलों के कुल 14 ठिकानों पर की गई। सीबीआई की इस कार्रवाई से संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया। जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं। माना जा रहा है कि इनसे गबन की रकम के इस्तेमाल और उसके नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग मिल सकते हैं।
कैसे सामने आया करोड़ों रुपये के गबन का मामला?
सीबीआई ने यह मामला 8 जून 2026 को दर्ज किया था। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा 25 मई 2026 को दिए गए आदेश के अनुपालन में की गई। मामला श्रवण कुमार द्विवेदी द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है। इससे पहले 21 मार्च 2025 को बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी किशन गुप्ता की शिकायत पर गौरीगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोप है कि सरकारी धन को सुनियोजित तरीके से विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया और करीब 4 करोड़ रुपये का गबन किया गया। शुरुआती जांच में वित्तीय अनियमितताओं के कई बिंदु सामने आने के बाद मामले की गंभीरता बढ़ी और अंततः इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगे गंभीर आरोप
सीबीआई ने इस मामले में बेसिक शिक्षा विभाग, गौरीगंज के तत्कालीन कनिष्ठ लेखा लिपिक मनोज मालवीय सहित पांच लोगों को आरोपी बनाया है। इनके अलावा एक ब्लॉक क्वालिटी कोऑर्डिनेटर, एक ब्लॉक एमआईएस कोऑर्डिनेटर, जगदीशपुर क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक तथा गौरीगंज क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि सभी आरोपितों ने आपसी साजिश के तहत सरकारी धन को अवैध रूप से अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित किया। इस पूरे घटनाक्रम में अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सीबीआई अब बैंक खातों के लेनदेन, संपत्तियों और धन के निवेश से जुड़े पहलुओं की भी गहराई से जांच कर रही है।
छापेमारी में मिले अहम सबूत, जांच अभी जारी
सीबीआई की छापेमारी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज और डिजिटल उपकरण मिले हैं, जिन्हें जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एजेंसी ने इन सभी सामग्रियों को जब्त कर उनकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि इनसे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि गबन की गई राशि कहां-कहां खर्च की गई और किन लोगों तक इसका लाभ पहुंचा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस कथित घोटाले में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं। फिलहाल सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि जांच के आगे बढ़ने के साथ कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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