Azam Khan News: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान (Azam Khan) को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिल पाई है। ईडी की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर शीर्ष अदालत ने सीधे सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने मामले को वापस हाई कोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। अब आजम खान (Azam Khan) को राहत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। उनके वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में उम्र और लगातार हो रही कार्रवाई का हवाला देते हुए राहत की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पहले हाई कोर्ट में सुनवाई कराने को प्राथमिकता दी।
सुप्रीम कोर्ट में क्यों नहीं मिली आजम खान को राहत?
आजम खान (Azam Khan) की याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ के सामने सुनवाई हुई। याचिका में ईडी की ओर से की गई गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को चुनौती दी गई थी। आजम खान (Azam Khan) की तरफ से दलील दी गई कि उन्हें इस मामले में राहत मिलनी चाहिए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस याचिका पर सीधे विचार करने से इनकार कर दिया। अदालत का कहना था कि मामले में पहले हाई कोर्ट के सामने अपनी बात रखी जानी चाहिए। इसके बाद शीर्ष अदालत ने याचिका को हाई कोर्ट भेजने का निर्देश दिया। साथ ही हाई कोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई करने का अनुरोध भी किया गया। इस घटनाक्रम के बाद आजम खान (Azam Khan) की कानूनी लड़ाई अब एक बार फिर हाई कोर्ट पहुंच गई है।
कपिल सिब्बल ने अदालत में उठाया 80 साल की उम्र का मुद्दा
सुनवाई के दौरान आजम खान (Azam Khan) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि आजम खान की उम्र करीब 80 वर्ष है और उन्हें लगातार कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। सिब्बल ने दलील दी कि आजम खान जेल से बाहर आए ही थे कि प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने उन्हें वर्ष 2019 के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने इस कार्रवाई के पीछे राजनीतिक मंशा होने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि इस तरह की कार्रवाई से आजम खान को राजनीतिक गतिविधियों और आगामी चुनावों से दूर रखने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, ये दलीलें आजम खान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत दिलाने में सफल नहीं हो सकीं। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला देने के बजाय इसे पहले हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए भेजने का रास्ता चुना।
ईडी की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को दी गई है चुनौती
दरअसल, आजम खान (Azam Khan) ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी है। उनका पक्ष ईडी की गिरफ्तारी की वैधता और न्यायिक हिरासत को लेकर सवाल उठा रहा है। इस मामले में वर्ष 2019 से जुड़े प्रकरण का भी उल्लेख किया गया है। आजम खान की ओर से आरोप लगाया गया है कि जेल से बाहर आने के बाद ईडी की गिरफ्तारी ने उनकी मुश्किलें फिर बढ़ा दीं। वहीं, कानूनी तौर पर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हाई कोर्ट में इस गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े तथ्यों पर क्या दलीलें रखी जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस हाई कोर्ट भेजे जाने का मतलब यह नहीं है कि गिरफ्तारी को सही या गलत ठहरा दिया गया है। फिलहाल इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अब हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई से ही आगे की कानूनी दिशा तय होगी।
16 नवंबर तक सुनवाई का अनुरोध, अब हाई कोर्ट से उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को हाई कोर्ट में भेजते हुए जल्द सुनवाई का अनुरोध किया है। आजम खान (Azam Khan) के पक्ष की ओर से 16 नवंबर तक मामले पर सुनवाई करने की मांग रखी गई है। अब सबकी नजरें हाई कोर्ट की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं। अगर वहां जल्द सुनवाई होती है तो आजम खान को अपनी गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत के खिलाफ दलीलें रखने का अवसर मिलेगा। हालांकि, उन्हें जमानत या किसी अन्य तरह की राहत मिलेगी या नहीं, यह हाई कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा।
