ASI टीम विवाद संभल का मामला सोमवार सुबह उस समय तूल पकड़ गया जब एएसआई की टीम शाही जामा मस्जिद के मुख्य गुंबद क्षेत्र में पहुंची। स्थानीय प्रशासन ने पहले ही सर्वे के लिए टीम को अनुमति दे दी थी, लेकिन टीम के अंदर प्रवेश करते ही माहौल एकदम से बदल गया। मस्जिद के दो सदस्यों—हाफिज और मोहम्मद काशिफ—ने टीम को आगे बढ़ने से रोक दिया। टीम के अधिकारियों ने बताया कि उनके पास सभी कानूनी दस्तावेज मौजूद थे, फिर भी उन्हें मुख्य गुंबद के निरीक्षण की अनुमति नहीं दी गई।
ASI टीम विवाद संभल को लेकर स्थानीय लोगों में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं कि आखिर अंदर ऐसा क्या है जिसे देखने से रोका जा रहा है।
अभद्रता, धक्का-मुक्की और गर्मा गया माहौल
ASI टीम विवाद संभल उस समय और गहरा गया जब टीम ने आगे बढ़ने की कोशिश की। टीम ने आरोप लगाया कि हाफिज और मोहम्मद काशिफ ने न केवल रोक-टोक की बल्कि अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए टीम के सदस्यों को धक्का भी दिया। इस दौरान मस्जिद परिसर के बाहर भीड़ जमा हो गई और दोनों पक्षों के बीच गर्मागर्मी का माहौल बन गया।
पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और किसी तरह स्थिति को शांत कराया। एएसआई अधिकारियों का कहना था कि सर्वे पूरी तरह सरकारी निर्देशों के तहत किया जा रहा था और इस तरह की बाधा न केवल अवैध है, बल्कि टीम की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।
FIR दर्ज, गंभीर धाराओं में ककेस
ASI टीम विवाद संभल के बाद पुलिस ने हाफिज और मोहम्मद काशिफ के खिलाफ धारा 132, 352 और 351(2) के तहत FIR दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ये धाराएं सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट और जानबूझकर रोकने से संबंधित हैं।
FIR दर्ज होने के बाद मामला और सख्त हो गया है। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि टीम को प्रवेश से रोकने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी। क्या यह सिर्फ गलतफहमी थी या इसके पीछे कोई संगठित आपत्ति?
ASI टीम विवाद संभल अब प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता बन चुका है।
क्या मुख्य गुंबद में कोई ऐतिहासिक सुराग?
ASI टीम विवाद संभल में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मस्जिद के मुख्य गुंबद तक सर्वे टीम को जाने से क्यों रोका गया? प्रशासन के सूत्र बताते हैं कि शाही जामा मस्जिद के इस हिस्से के बारे में कुछ ऐतिहासिक रिकॉर्ड पिछले वर्षों में सामने आए थे, जिसके बाद यह सर्वे प्रस्तावित किया गया था।
स्थानीय लोग भी तरह-तरह के अनुमान लगा रहे हैं—क्या वहां कोई पुरानी संरचना है? क्या कोई शिलालेख मौजूद हो सकता है? या फिर केवल गलतफहमी ने इस विवाद को जन्म दिया?
जो भी हो, एएसआई सर्वे अभी भी अधूरा है और प्रशासन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि कानूनी प्रक्रिया के तहत सर्वे पूरा कराया जाएगा। फिलहाल पूरे संभल में इस घटना के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है, क्योंकि मामला धार्मिक स्थल और सरकारी कार्रवाई से जुड़ा हुआ है।
