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पूर्व पीएम शेख हसीना को सुनाई गई फांसी की सजा, निहत्थे नागरिकों पर गोली चलाने के आरोप में दोषी करार

बांग्लादेश की विशेष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को निहत्थे नागरिकों पर गोली चलवाने और मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई।

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बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सोमवार सुबह ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसे देश ने दशकों में नहीं देखा था। एक तरफ अदालत परिसर की कड़ी सुरक्षा, दूसरी तरफ फैसले का इंतजार करती लाखों निगाहें—इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुना दी। अदालत के अनुसार, हसीना ने अपने शासनकाल के दौरान उन हालातों में गोलीबारी के आदेश दिए जब विरोध कर रहे नागरिक निहत्थे थे और किसी भी तरह की हिंसा में शामिल नहीं थे।
फैसले के साथ ही कोर्टरूम में सन्नाटा फैल गया और बाहर इंतजार कर रहे समर्थक व विरोधी दोनों स्तब्ध रह गए। यह फैसला एक लंबी सुनवाई और सैकड़ों गवाहियों के बाद सामने आया है। अदालत ने माना कि उस हिंसा ने देश में लोकतांत्रिक अधिकारों को गहरी चोट पहुंचाई थी।

आरोपों की परतें खुलीं, अदालत ने बताया अपराध का पैटर्न

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने उन घटनाओं का ब्योरा दिया जिनमें पुलिस और सुरक्षा बलों ने विरोध कर रहे नागरिकों पर गोली चलाई थी। कई गवाहों ने अदालत में बताया कि प्रदर्शनकारी निहत्थे थे और उनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे। बताया गया कि कई घटनाएं अचानक नहीं बल्कि “सोची-समझी सरकारी कार्रवाई” का हिस्सा थीं।
जांच रिपोर्ट में गंभीर आरोप शामिल थे—कई प्रदर्शनकारी मौके पर ही मारे गए, कुछ घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई। अदालत ने माना कि उन कार्रवाइयों में अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया, जो किसी भी लोकतांत्रिक शासन में अस्वीकार्य माना जाता है। अदालत ने यह भी कहा कि आदेशों की श्रृंखला और घटनाओं की समानता यह साबित करती है कि हिंसा एक योजनाबद्ध कार्रवाई थी।

हसीना का जवाब—‘मुझे राजनीतिक साजिश में फंसाया गया’

फैसले के बाद शेख हसीना की कानूनी टीम ने तुरंत इसे चुनौती देने का संकेत दिया है। उनके वकीलों का कहना है कि यह पूरा मामला “राजनीतिक प्रतिशोध” का परिणाम है और उनके खिलाफ सबूतों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

दूसरी ओर, हसीना के समर्थकों का दावा है कि जिस समय हिंसा हुई, उस दौरान वे कई सरकारी बैठकों में थीं और घटनाओं से उनका सीधा लेना-देना नहीं था। वहीं, विपक्ष का कहना है कि यह फैसला लंबे समय से चली आ रही शिकायतों का न्यायिक परिणाम है, जिसे रोकना अब किसी के वश में नहीं था।

बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी पूर्व प्रधानमंत्री को इस स्तर पर दोषी ठहराया गया है, जिससे देश की सियासत में भूचाल आ गया है।

 फैसले के बाद पूरे देश में तनाव, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर

फैसले के बाद ढाका, चिटगांव और नारायणगंज में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। मुख्य सड़कों पर बैरियर लगाए गए हैं और भीड़ को रोकने के लिए पुलिस की अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं।
कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं, वहीं कुछ जगहों पर हसीना के समर्थक शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां आशंका जता रही हैं कि अगले 48 घंटे सबसे संवेदनशील रह सकते हैं।
देश के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आने वाले दिनों में बांग्लादेश की राजनीति को पूरी तरह बदल देगा। इससे न केवल सत्ता समीकरण प्रभावित होंगे, बल्कि देश की न्याय प्रणाली को लेकर भी कई सवाल फिर से चर्चा में आ सकते हैं।

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