4 अगस्त को फुकेत से नई दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 (Airbus A320neo) के साथ आसमान में जो हुआ, वह सामान्य हवा के झोंकों या टर्बुलेंस से कहीं ज्यादा खतरनाक था। विमान बनाने वाली कंपनी एयरबस की शुरुआती इंजीनियरिंग रिपोर्ट के मुताबिक, इस उड़ान के दौरान विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक के बाद एक पूरी तरह ठप हो गए थे। स्थिति इतनी डरावनी थी कि करीब चार सेकंड तक विमान की मुख्य कंट्रोल सतहों ने काम करना बंद कर दिया, जिससे विमान अचानक 300 फीट नीचे आ गया और कई लोग घायल हो गए। ब्लैक बॉक्स के डेटा को डिकोड करने के बाद सामने आई इस शुरुआती रिपोर्ट ने एविएशन जगत में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि अमूमन विमानों में सुरक्षा के लिए तीन अलग-अलग हाइड्रोलिक बैकअप होते हैं, जिनका एक साथ फेल होना बेहद दुर्लभ और गंभीर मामला माना जाता है।
महज 7 सेकंड का वह दौर जब थम गईं सांसें
एयरबस की रिपोर्ट में सेकंड-दर-सेकंड दर्ज विवरण इस घटना की गंभीरता को बयां करता है। घटना की शुरुआत तब हुई जब सबसे पहले ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम फेल हुआ, जिसके बाद विमान के सिस्टम ने अपने आप बैकअप पर स्विच होने की कोशिश की। लेकिन इसके अगले ही सेकंड ब्लू और येलो सिस्टम भी जवाब दे गए और कोई बैकअप नहीं बचा। इन सात अहम सेकंड के भीतर विमान की नाक ऊपर उठ गई, ऑटोपायलट अपने आप डिसकनेक्ट हो गया और को-पायलट द्वारा लगातार नाक नीचे करने का कमांड दिए जाने के बावजूद विमान ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि कंट्रोल सतहें हवा के बहाव में बेकाबू हो चुकी थीं। हैरानी की बात यह है कि करीब सात सेकंड बाद ये सभी सिस्टम अपने आप दोबारा सक्रिय हो गए, वरना यह तकनीकी खामी किसी बड़े हादसे में बदल सकती थी।
सेंसर की गलती या तकनीकी फॉल्ट? अभी रहस्य बरकरार
इस पूरी घटना के पीछे असली वजह क्या थी, इसे लेकर एयरबस की रिपोर्ट में अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि कम से कम दो प्रेशर स्विच ने कम दबाव का संकेत दिया था और ग्रीन हाइड्रोलिक के एक प्रेशर स्विच में गड़बड़ी पकड़ी गई, लेकिन हाइड्रोलिक ऑयल के लीक होने या पंप खराब होने जैसी कोई पुष्टि नहीं हुई है। अब मुख्य सवाल यह है कि क्या वास्तव में हाइड्रोलिक दबाव गिरा था या फिर सेंसर और उनकी वायरिंग ने गलत सिग्नल भेजकर सिस्टम को भ्रमित किया था। इसी पहेली को सुलझाने के लिए एयरबस ने एयर इंडिया को विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम, प्रेशर स्विच, ट्रांसड्यूसर और ऑटोमैटिक फ्लाइट सिस्टम के कंप्यूटरों का कड़ा परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
एयरबस के सख्त निर्देश और जांच की अगली राह
मामले की जटिलता को देखते हुए एयरबस ने एयर इंडिया को इस विमान के मेंटेनेंस रिकॉर्ड और पिछले एक महीने की कार्यप्रणाली की पूरी जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इसके अलावा, अचानक ऊंचाई और दिशा बदलने के कारण विमान के ढांचे (Airframe) पर पड़े अत्यधिक दबाव को देखते हुए एयरफ्रेम की भी विशेष तकनीकी जांच के आदेश दिए गए हैं। हालांकि यह एयरबस का शुरुआती आकलन है और भारत की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी (AAIB) इस पूरे मामले की अंतिम और स्वतंत्र जांच कर रही है, लेकिन इस घटना ने आधुनिक विमानों की ऑटोमैटिक और हाइड्रोलिक सुरक्षा प्रणालियों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्रू मेंबर्स और पायलटों के विस्तृत बयान मिलने के बाद ही इस बात से पूरी तरह पर्दा उठ पाएगा कि उस खौफनाक पल में कॉकपिट के भीतर असल स्थिति क्या थी।
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