समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रयागराज माघ मेले में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की मूर्ति स्थापित न होने को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी नियमों की बात करते हैं तो पहले यह साफ करें कि चापलूसी किस नियम में आती है। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि अगर अधिकारी नियम बदल सकते हैं तो समाजवादी पार्टी भी भगवानों की मूर्तियां वहां लगाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि माघ मेले में धार्मिक आस्था से जुड़े कई आयोजन होते हैं, ऐसे में अगर नियमों की मनमानी व्याख्या की जा रही है तो सरकार को इसका जवाब देना होगा। उनके इस बयान के बाद माघ मेले और प्रशासनिक फैसलों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
BJP के ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर सीधा तंज
अखिलेश यादव ने बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि अभी तो ये विधायक सरकार के साथ बैठे-बैठे सब कुछ खा रहे थे, लेकिन अगर ये सच में सरकार के विरोध में खड़े हो गए तो क्या होगा? सपा अध्यक्ष ने यह टिप्पणी करते हुए इशारों-इशारों में बीजेपी के अंदरूनी समीकरणों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब किसी पार्टी को बार-बार जातिगत बैठकों की जरूरत पड़ने लगे, तो यह साफ संकेत होता है कि अंदर कुछ ठीक नहीं चल रहा। अखिलेश यादव के इस बयान को बीजेपी के भीतर बढ़ती बेचैनी से जोड़कर देखा जा रहा है।
एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
अखिलेश यादव ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री खुद कह चुके हैं कि चार करोड़ वोट कट गए हैं, तो अब जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे चुनाव आयोग और अधिकारियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर आंकड़ों में अंतर पाया गया तो चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि इंटेंसिव प्रोविजन का असली मतलब क्या है। सपा अध्यक्ष ने इस प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सबसे अहम भरोसा चुनाव प्रणाली पर होता है।
अधिकारियों और चुनाव की निष्पक्षता पर सवालिया निशान
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि यह सिर्फ आंकड़ों का मामला नहीं है, बल्कि अधिकारियों और चुनाव प्रक्रिया की साख का सवाल है। उन्होंने शंका जताई कि कहीं तकनीक के नाम पर किसी तरह की हेराफेरी की तैयारी तो नहीं की जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के बयानों के बाद अगर कोई बेईमानी होती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सपा अध्यक्ष ने साफ किया कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों से कोई समझौता नहीं करेगी और हर स्तर पर सवाल उठाती रहेगी। उनके इन बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ा दी है।
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