उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक दुखद खबर सामने आई है। विजयनगर थाना क्षेत्र में रहने वाले 22 वर्षीय जतिन कुमार की परीक्षा से कुछ घंटे पहले मौत हो गई। वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (यूजी) की तैयारी कर रहे थे और 21 जून को होने वाली परीक्षा में शामिल होने वाले थे। शुक्रवार सुबह जब परिवार के सदस्य उन्हें जगाने पहुंचे, तो वह कमरे में अचेत मिले। सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। घटना के बाद परिवार और आसपास के लोगों में शोक का माहौल है।
मोबाइल फोन से मिला वीडियो
जांच के दौरान पुलिस को छात्र के मोबाइल फोन से एक वीडियो मिला है, जिसे घटना से पहले रिकॉर्ड किया गया बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, वीडियो की सत्यता और उससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, छात्र ने वीडियो में किसी तरह के बाहरी दबाव से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और परिजनों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
लगातार सामने आ रहे मामलों ने बढ़ाई चिंता
पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग राज्यों से NEET की तैयारी कर रहे छात्रों से जुड़ी कई दुखद घटनाएं सामने आई हैं। दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश समेत कई जगहों पर छात्रों की मौत के मामलों ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सहायता और भावनात्मक सहयोग की भी जरूरत होती है। परिवार और शिक्षकों की भूमिका ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी परीक्षा का परिणाम जीवन का अंतिम फैसला नहीं होता। छात्रों को अपनी भावनाओं को खुलकर साझा करने और जरूरत पड़ने पर मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। माता-पिता और शिक्षकों को भी बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और उन पर अतिरिक्त दबाव बनाने से बचना चाहिए। पुलिस ने अपील की है कि इस मामले को लेकर अफवाहों से बचें और जांच पूरी होने का इंतजार करें। इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।
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