राजधानी लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। तीनों की जमानत याचिका मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता और सुनवाई सेशन कोर्ट में होने के आधार पर राहत देने से इनकार किया। अब आरोपियों के पास जमानत के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प है।
कोर्ट से राहत नहीं, जेल में रहेंगे तीनों आरोपी
शिवा शर्मा की मौत के मामले में तीनों आरोपियों की ओर से अदालत में जमानत की अर्जी दाखिल की गई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाएं स्वीकार नहीं कीं। इस फैसले के बाद श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और तनवीर अली को फिलहाल न्यायिक हिरासत में रहना होगा। मामले में आगे की सुनवाई और जांच की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, अदालत में अभी आरोप साबित होना बाकी है।
अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने पर हुई थी शिवा की मौत
यह मामला लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र स्थित प्राग नारायण रोड के अवध ग्रीन अपार्टमेंट से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, 9 अक्टूबर को कारोबारी और कैफे संचालक शिवा शर्मा की अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। शुरुआत में घटना को हादसे के तौर पर देखा गया, लेकिन बाद में मृतक के परिवार ने इस पर सवाल उठाए। परिवार ने आशंका जताई कि शिवा के साथ मारपीट करने के बाद उसे नीचे फेंका गया था।
मां की शिकायत पर हत्या का मुकदमा दर्ज
शिवा शर्मा की मां रंजना शर्मा ने पुलिस में शिकायत देकर बेटे की मौत के मामले में हत्या का आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और तनवीर अली समेत आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया। यह धारा हत्या से संबंधित है। पुलिस मामले से जुड़े साक्ष्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। परिवार के आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।
नागपुर से गिरफ्तारी के बाद लखनऊ लाए गए आरोपी
मामले की जांच के दौरान लखनऊ पुलिस और उत्तर प्रदेश एसटीएफ की संयुक्त टीम ने नागपुर में कार्रवाई कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया और अदालत में पेश किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनकी कानूनी मुश्किलें फिलहाल बनी हुई हैं। आगे उन्हें राहत मिलती है या नहीं, यह अदालत में होने वाली आगामी कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
