Homeदेशबिहार गई हथिनी के जाते ही बेकाबू हुआ यूपी का हाथी! 12...

बिहार गई हथिनी के जाते ही बेकाबू हुआ यूपी का हाथी! 12 घंटे तक मचाया उत्पात, फिर कानपुर में क्यों लाया गया?

वाराणसी के रामनगर में हथिनी के जाने के बाद टस्कर हाथी अचानक आक्रामक हो गया। महावत को घायल करने से लेकर गाड़ियों को नुकसान पहुंचाने तक की घटना के बाद उसे कैसे काबू किया गया? जानें पूरा मामला।

-

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित रामनगर में 18 अक्टूबर को रामलीला मेले के दौरान एक विशाल टस्कर हाथी ने अचानक ऐसा उत्पात मचाया कि मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी फैल गई। करीब पांच टन वजनी इस हाथी ने अपने महावत पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसके बाद वह आसपास की सड़कों पर दौड़ने लगा। जानकारी के मुताबिक, हाथी ने कई बिजली के खंभे उखाड़ दिए और तीन ऑटो को उठाकर पटक दिया। उसकी आक्रामक गतिविधियों से लोगों की जान पर खतरा पैदा हो गया। हालात बिगड़ते देख वन विभाग, पशु चिकित्सकों और प्रशासन की टीम को मौके पर बुलाया गया। हाथी को पकड़ने के लिए कई महावतों ने कोशिश की, लेकिन वह किसी के नियंत्रण में नहीं आ रहा था। करीब 12 घंटे तक चले इस अभियान के बाद उसे दवा की मदद से शांत किया जा सका। इसके बाद उसे कानपुर चिड़ियाघर ले जाए जाने की जानकारी सामने आई।

बिहार से आई हथिनी के जाने के बाद बदला हाथी का व्यवहार

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि आखिर शांत रहने वाला हाथी अचानक इतना आक्रामक कैसे हो गया। रेस्क्यू अभियान में शामिल पशु चिकित्सक डॉ. नासिर खान के अनुसार, हाथी के व्यवहार में बदलाव की वजह जानने के लिए उसके पिछले दिनों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई। महावतों ने बताया कि रामनगर की रामलीला के दौरान बिहार से एक हथिनी आई थी। बताया गया कि हथिनी प्रजनन के अनुकूल अवस्था यानी हीट में थी और कुछ दिन वहां रहने के बाद वापस चली गई। पशु चिकित्सक के अनुसार, संभव है कि हथिनी के संपर्क में आने के बाद नर हाथी के हार्मोन और व्यवहार में बदलाव आया हो। हाथियों की सूंघने की क्षमता बहुत तेज होती है और वे मादा की प्रजनन अवस्था से जुड़े संकेत पहचान सकते हैं। हालांकि, हाथी के बेकाबू होने की वजह केवल हथिनी का चले जाना था, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञ इसे संभावित हार्मोनल बदलाव और आक्रामक व्यवहार से जोड़कर देख रहे हैं।

शाम से आधी रात तक चला रेस्क्यू, आखिर दवा देकर क्यों करना पड़ा काबू?

हाथी को पकड़ने के लिए कई जिलों से विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई थी। डॉ. नासिर खान और गोरखपुर की टीम समेत वन विभाग के कर्मचारी तथा करीब 25 महावत अभियान में जुटे थे। जानकारी के अनुसार, चिकित्सकीय टीम शाम करीब छह बजे घटनास्थल पर पहुंची। शुरुआत में हाथी को बिना बेहोश किए पकड़ने का प्रयास किया गया। शाम सात बजे से आधी रात तक महावतों ने हुक और चेन की मदद से उसे नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन हाथी लगातार आक्रामक बना रहा। इसके बाद विशेषज्ञों ने ट्रैंक्विलाइजिंग गन से दवा देने का फैसला किया। इस प्रक्रिया में हाथी को सुरक्षित दूरी से डार्ट किया गया, ताकि उसे और आसपास मौजूद लोगों को नुकसान से बचाया जा सके। दवा का असर होने के बाद हाथी की स्थिति पर निगरानी रखना भी जरूरी था। चिकित्सकों के मुताबिक, इतने भारी जानवर को बेहोशी की अवस्था में संभालना आसान नहीं होता। उसकी शारीरिक स्थिति और सांस लेने की प्रक्रिया पर लगातार ध्यान देना पड़ता है।

नर हाथियों में क्यों बढ़ जाती है आक्रामकता? 

पशु चिकित्सक के अनुसार, नर हाथियों में कुछ समय के दौरान मस्त जैसी अवस्था देखने को मिल सकती है। इस दौरान टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ने से उनके व्यवहार में बदलाव और आक्रामकता आ सकती है। ऐसी स्थिति में हाथी अपने परिचित महावत की बात भी नहीं मान सकता और हमला कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रामनगर की घटना में हाथी निश्चित रूप से मस्त की अवस्था में था। उन्होंने केवल उसके व्यवहार में इस अवस्था से मिलते-जुलते लक्षण होने की संभावना जताई। हाथी को काबू करने के बाद कानपुर चिड़ियाघर ले जाए जाने की खबर है, जहां उसकी देखभाल और व्यवहार पर निगरानी महत्वपूर्ण होगी। इस घटना ने एक बार फिर बड़े वन्यजीवों के साथ सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों के लिए अब यह समझना अहम होगा कि हाथी के व्यवहार में अचानक आए बदलाव के पीछे हार्मोनल कारण थे या कोई अन्य वजह भी जिम्मेदार थी।

Read More-कनाडा में कैसे पकड़ा गया पंजाब का कुख्यात गैंगस्टर अमृतपाल बाठ? सरपंच हत्याकांड से लेकर अकाली दल तक, जानें पूरा मामला

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest posts