Homeउत्तर प्रदेशप्रयागराजमाघ मेले में क्यों रोका गया था स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का रथ, प्रशासन...

माघ मेले में क्यों रोका गया था स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का रथ, प्रशासन बोला ‘स्नान पर नहीं, पहिया लगी पालकी पर थी आपत्ति…’

प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के संगम स्नान विवाद पर प्रशासन ने अपनी प्रतिक्रिया दी। जानें क्यों प्रशासन ने पहिया लगी पालकी पर आपत्ति जताई और किन कारणों से सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया गया।

-

माघ मेले के मौनी अमावस्या महापर्व पर प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के संगम स्नान को लेकर विवाद ने प्रशासन और अनुयायियों के बीच तनाव बढ़ा दिया। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि स्वामी को स्नान करने से नहीं रोका गया, लेकिन संगम नोज तक पहिया लगी पालकी पर पहुंचने पर आपत्ति जताई गई। संगम घाट पर उस समय भारी भीड़ थी, और प्रशासन का मानना था कि पालकी पर सवार होकर पहुंचने पर भगदड़ या किसी अप्रिय घटना का खतरा बढ़ सकता था।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कई अनुयायी प्रशासनिक आग्रह के बावजूद अपने धर्माचार्य के साथ घाट तक पहुंचने के लिए संगम मार्ग पर बढ़ते रहे। यह स्थिति प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो गई, क्योंकि सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल था। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी श्रद्धालु की सुरक्षा सर्वोपरि थी और इसी कारण प्रशासन ने प्रोटोकॉल और वाहन की अनुमति देने से इंकार किया।

प्रशासन का पक्ष: सुरक्षा और प्रोटोकॉल की वजह

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायियों ने बिना अनुमति सैकड़ों लोग लेकर वाहन से संगम के पास बैरियर तक पहुंचने की कोशिश की। प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा कारणों से वाहन और प्रोटोकॉल की अनुमति देने से इंकार किया था। यह कहना गलत नहीं होगा कि स्वामी और उनके अनुयायियों का यह कदम प्रशासन के नियमों के खिलाफ था।

डीएम मनीष कुमार वर्मा ने बैरियर तोड़ने की जांच का आदेश दिया। माघ मेलाधिकारी ऋषि राज ने बताया कि संगम मार्ग को तीन घंटे तक बाधित किया गया, जिसके कारण सौंपे गए पुलिसकर्मियों को व्यवस्थापन में कठिनाई का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने यह भी कहा कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनुचित तरीके से घाट तक पहुंचने की कोशिश किसी भी बड़ी दुर्घटना की आशंका पैदा कर सकती थी।

सीसीटीवी फुटेज और जांच प्रक्रिया

पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बताया कि बैरियर तोड़ने और संगम मार्ग पर बाधा उत्पन्न करने की पूरी घटना की सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है। इसके आधार पर प्रशासन वैधानिक कार्रवाई करेगा। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉ. अजयपाल शर्मा, डीआइजी मुख्यालय विजय ढुल, एसपी मेला नीरज पांडेय और उप मेलाधिकारी विवेक शुक्ला ने भी घटना स्थल का निरीक्षण किया और प्रबंधन में सहयोग किया।

माघ मेला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं हैं। इस आदेश का पालन कराना प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि किन कारणों से बैरियर तोड़ा गया और कौन-कौन से नियमों का उल्लंघन हुआ। इस प्रक्रिया में मेलाधिकारी और पुलिस प्रशासन दोनों पूरी तरह सक्रिय हैं।

श्रद्धालुओं और अनुयायियों का अनुभव

माघ मेलाधिकारी ऋषि राज ने कहा कि घाट पर तीन घंटे तक मुख्य वापसी मार्ग बाधित रहने के कारण सैकड़ों श्रद्धालुओं को कठिनाई का सामना करना पड़ा। सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को अलग-अलग चेन बनाकर व्यवस्था संभालनी पड़ी।

अनुयायियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि उनका धर्माचार्य केवल स्नान करने के लिए घाट पर पहुंचे थे। दूसरी ओर, प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि नियम और सुरक्षा प्राथमिकता हैं। यह विवाद यह संकेत देता है कि माघ मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में सुरक्षा और प्रोटोकॉल का पालन अत्यंत आवश्यक है, और किसी भी असुविधाजनक स्थिति से बचने के लिए अधिकारियों को कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

Read More-‘आप शंकराचार्य कैसे?’ माघ मेला प्रशासन का अविमुक्तेश्वरानंद पर बड़ा सवाल, क्यों दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

Read More- एक मौत, कई गुनहगार! इंजीनियर की डूबकर मौत के बाद बिल्डर गिरफ्तार, CM योगी के गुस्से से हिला नोएडा सिस्टम

Read More-घोर कलयुग! यमुना में फिर दिखा कालिया नाग? वृंदावन से वायरल VIDEO ने बढ़ाई हलचल, जानिए पूरा सच

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest posts