उत्तर प्रदेश के कन्नौज स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय अनौगी में खाने की गुणवत्ता और स्कूल परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा सामने आया है। गुरुवार को हाईस्कूल, कक्षा 11 और इंटरमीडिएट के करीब 95 छात्र-छात्राओं ने भोजन करने से इनकार कर दिया और खुद को छात्रावास के पांच कमरों में बंद कर लिया। छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू करते हुए स्कूल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बताया जा रहा है कि छात्र करीब 14 घंटे तक कमरों के अंदर रहे। अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में जिलाधिकारी के पहुंचने और जांच का भरोसा मिलने के बाद छात्रों ने दरवाजा खोला।
खराब खाना और गंदगी का आरोप लगाकर शुरू किया विरोध
जवाहर नवोदय विद्यालय अनौगी में कक्षा छह से लेकर इंटरमीडिएट तक करीब 450 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। गुरुवार सुबह करीब छह बजे 95 विद्यार्थियों ने नाश्ता और भोजन करने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने छात्रावास के कमरों को अंदर से बंद कर लिया और भूख हड़ताल शुरू कर दी। छात्रों का आरोप है कि उन्हें कई दिनों से ठीक तरह से पका हुआ भोजन नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि चावल कई बार कच्चे रह जाते हैं और दाल-सब्जियों में भी पर्याप्त मसाला नहीं होता। छात्रों ने स्कूल परिसर में गंदगी और पीने के पानी की व्यवस्था खराब होने की शिकायत भी की। उनका आरोप है कि आरओ का पानी ठीक नहीं है, इसलिए उन्हें हैंडपंप के पानी से काम चलाना पड़ता है।
प्रधानाचार्य समेत तीन लोगों के तबादले की मांग पर अड़े छात्र
विरोध कर रहे छात्रों ने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी शिकायत करने की बात कही। उनका आरोप है कि समस्याओं की जानकारी स्कूल प्रशासन को देने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसी वजह से छात्रों ने प्रधानाचार्य संदेश पांडेय, शिक्षक पीयूष यादव और हेड कुक विभोर कटियार के स्थानांतरण की मांग रख दी। छात्रों को समझाने के लिए मौके पर एसडीएम वैभव गुप्ता, जिला विद्यालय निरीक्षक पप्पू सरोज और सीओ शिल्पा वर्मा पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायतों की जांच कराई जाएगी, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर कायम रहे। उन्होंने साफ कहा कि जब तक उनकी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे भोजन नहीं करेंगे।
अभिभावकों को भी बुलाया गया, लेकिन बच्चों ने नहीं खोला दरवाजा
छात्रों को मनाने के लिए स्कूल प्रशासन ने अभिभावकों की मदद लेने की भी कोशिश की। प्रधानाचार्य की ओर से कुछ अभिभावकों को फोन कर विद्यालय बुलाया गया। अभिभावकों ने भी छात्रों से बातचीत कर हड़ताल खत्म करने और कमरे से बाहर आने की अपील की, लेकिन छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटे। इस दौरान स्कूल में काफी देर तक अधिकारियों और छात्रों के बीच बातचीत का दौर चलता रहा। छात्र लगातार डीएम को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। मामला बढ़ने के बाद प्रशासन की नजर भी पूरी तरह विद्यालय की स्थिति पर टिक गई।
डीएम बोले- जांच में लापरवाही मिली तो होगी सख्त कार्रवाई
विद्यालय के प्रधानाचार्य संदेश पांडेय ने छात्रों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चों को गुणवत्ता के अनुसार भोजन दिया जा रहा है। उनका कहना है कि बच्चे किसी के बहकावे में आकर कमरों में बंद हो गए थे। दूसरी ओर जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल में भोजन और अन्य व्यवस्थाओं की जांच के लिए टीम गठित करने की बात कही। डीएम ने स्पष्ट किया कि जांच में यदि भोजन की गुणवत्ता या किसी अन्य व्यवस्था में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल छात्रों की शिकायतों की जांच के बाद ही यह साफ होगा कि विद्यालय में वास्तव में किस स्तर की अनियमितताएं थीं और उनकी मांगों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है।
Read More-मैदान पर ऐसा क्या हुआ कि श्रीलंका के क्रिकेट कोच की चली गई जान? 17 साल के खिलाड़ी क्यों हुआ गिरफ्तार
