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“सिंगापुर में जुबीन के साथ रूम शेयर करने को कहा गया…” आरोपी महिला का दावा, जाने क्या है पूरा मामला

जुबीन गर्ग की सिंगापुर में हुई रहस्यमयी मौत के मामले में बड़ा मोड़ आया है। गुवाहाटी कोर्ट ने मुख्य आरोपी अमृतप्रभा महंता समेत तीन लोगों की जमानत खारिज कर दी। 

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सिंगापुर में मशहूर संगीतकार जुबीन गर्ग की मौत के मामले में अब कानूनी शिकंजा और कसता नजर आ रहा है। शुक्रवार को गुवाहाटी की सत्र अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने मुख्य आरोपी संगीतकार अमृतप्रभा महंता और जुबीन गर्ग के दो निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) की बेल याचिकाएं खारिज कर दीं। सत्र न्यायाधीश ने साफ शब्दों में कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और इन अपराधों में मृत्युदंड या आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। कोर्ट के अनुसार, अभियोजन पक्ष के तर्क पहली नजर में यह संकेत देते हैं कि जुबीन गर्ग की मौत कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का नतीजा हो सकती है। अदालत ने माना कि इस मामले में गहराई से जांच और गवाहों के बयान बेहद अहम हैं, ऐसे में आरोपियों को जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है।

आरोपी महिला का दावा: “विदेश में आपत्ति नहीं कर सकी”

जमानत याचिका के दौरान अमृतप्रभा महंता की ओर से जो दलीलें दी गईं, उन्होंने पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया। उनके वकील ने अदालत को बताया कि अमृतप्रभा पिछले कई वर्षों से जुबीन गर्ग के साथ असम और देश के अन्य हिस्सों में परफॉर्म करती रही हैं। सिंगापुर के नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में भी वह जुबीन के कहने पर ही गई थीं। याचिका में कहा गया कि 29 वर्षीय अमृतप्रभा के लिए जुबीन पिता समान थे। उनके अनुसार, सिंगापुर पहुंचने के बाद उन्हें यह पता चला कि होटल में उन्हें जुबीन के साथ एक ही कमरा दिया गया है। विदेश में होने के कारण वह इस कमरे के अलॉटमेंट पर कोई आपत्ति नहीं जता सकीं और आयोजकों के फैसले को मानना पड़ा। याचिका में यह भी कहा गया कि उन्हें यॉट राइड की जानकारी एक दिन पहले तक नहीं थी। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को जमानत के लिए पर्याप्त नहीं माना और अभियोजन के गंभीर आरोपों को प्राथमिकता दी।

पुलिस की चार्जशीट में क्या-क्या आरोप लगे हैं

असम पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में अमृतप्रभा महंता पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, उन्होंने सिंगापुर के होटल रूम में जुबीन गर्ग को जरूरत से ज्यादा शराब पीने के लिए उकसाया। इतना ही नहीं, उन्हें यह जानकारी होने के बावजूद कि जुबीन की तबीयत ठीक नहीं है और वह नींद की कमी से जूझ रहे हैं, उन्होंने इस बारे में न तो उनके मैनेजर को बताया और न ही उनकी पत्नी को। चार्जशीट में यह भी आरोप है कि अमृतप्रभा ने जुबीन को अत्यधिक नशे की हालत में बिना लाइफ जैकेट के समुद्र में तैरने के लिए प्रोत्साहित किया। वहीं, जुबीन के दो पीएसओ नंदेश्वर बोराह और परेश बैश्य पर आपराधिक साजिश और विश्वासघात के आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पीएसओ पर जुबीन के पैसों के दुरुपयोग का आरोप समाज पर गलत असर डालने वाला गंभीर अपराध है। इसी वजह से कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी।

सिंगापुर बनाम भारत: जांच को लेकर टकराव और पत्नी की अपील

जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर के लाजरस द्वीप पर एक यॉट यात्रा के दौरान हुई थी। सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट में हुई जांच में वहां की पुलिस ने बताया कि जुबीन अत्यधिक नशे में थे और उन्होंने लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था। सिंगापुर पुलिस इस घटना को एक दुर्घटना मान रही है और इसे डूबने से हुई मौत बताया गया है। दूसरी ओर, भारत में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इस मामले को हत्या और आपराधिक साजिश मानते हुए करीब 2,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जुबीन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने जमानत का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले के लिए विशेष अदालत और तेज सुनवाई की मांग की है। गरिमा का कहना है कि जब तक मुकदमा पूरा नहीं हो जाता, किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 फरवरी 2026 की तारीख तय की है। अब पूरे देश की नजर इस केस पर टिकी है कि आगे जांच और सुनवाई में क्या नए खुलासे सामने आते हैं।

 

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